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रामेश्वर शुक्ल 'अंचल' की रचनाएँ : Rameshwar Shukla Anchal Rachnayein

2026-11-05 · हिंदी कविता / Hindi Poetry

रामेश्वर शुक्ल 'अंचल' छायावादोत्तर कवि थे, यानी उस दौर के कवि जिन्होंने छायावाद के बाद आई नई कविता की ज़मीन तैयार की। इस दौर की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि कविता फिर से आम आदमी के पास लौटी — भारी-भरकम बिंब और उलझी हुई भाषा की जगह सीधी बात और साफ़ लय। अंचल जी की कविता में यही सादगी है, पर सादगी का मतलब यहाँ उथलापन नहीं है। उनकी कविताओं में प्रेम, विरह और जीवन-संघर्ष की ऐसी आवाज़ है जो सीधे पाठक तक पहुँचती है — जैसे कोई अपने ही मन की बात कह रहा हो। 'उतना तुम में विश्वास बढ़ा' जैसी कविताएँ इसका अच्छा उदाहरण हैं, जिनमें टूटन के बीच भी एक अजीब-सा भरोसा बना रहता है। उनकी कविता पढ़ते हुए किसी शब्दकोश की ज़रूरत नहीं पड़ती, पर बात मन में रह जाती है।

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