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सियारामशरण गुप्त की रचनाएँ : Siyaramsharan Gupt Rachnayein

2026-11-05 · हिंदी कविता / Hindi Poetry

सियारामशरण गुप्त राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के छोटे भाई थे, पर उन्होंने अपनी अलग राह बनाई और अपनी अलग पहचान कमाई। जहाँ बड़े भाई की कविता में राष्ट्रीय चेतना प्रमुख थी, वहाँ सियारामशरण की कविता में करुणा, दया और मानवीय संवेदना का स्वर गहरा है। उन्होंने इतिहास को काव्य का विषय बनाया — 'मौर्य विजय' में चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य के दौर की राजनीति है, 'पाटलिपुत्र' में उसी नगर की कथा, और 'दिवोदास' में बुद्धकालीन समाज। इन खंडकाव्यों में उन्होंने सिर्फ़ राजाओं की जीत नहीं लिखी, बल्कि उस दौर के आम लोगों की पीड़ा भी लिखी — यही उन्हें दूसरे ऐतिहासिक कवियों से अलग करता है। उनकी भाषा सरल है और लय साफ़, इसलिए लंबे खंडकाव्य भी पढ़े जाते हैं। 'नकुल' जैसी रचनाओं में उन्होंने महाभारत के गौण पात्रों की ओर देखा, जो उस दौर में नई बात थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में लिखी उनकी कविताओं में देश-प्रेम साफ़ झलकता है, पर वे कभी नारेबाज़ी में नहीं बदलतीं।

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