रामनरेश त्रिपाठी द्विवेदी युग के कवि थे, और उन्हें 'पथिक' नाम की एक ही कविता ने अमर कर दिया। यह कविता उस दौर में चर्चा का विषय बन गई थी, क्योंकि उसमें कविता का ढंग ही बदल दिया गया था — लंबे-चौड़े आदर्शों की जगह एक साधारण राहगीर की आवाज़ थी, जो रास्ता चलते हुए अपने मन की बात कह रहा है। उनकी कविता में गाँव, खेत, किसान और साधारण जन-जीवन की सुगंध है। उस समय की कविता अक्सर राजा-रानी, देवता या इतिहास के बड़े पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती थी, इसलिए आम आदमी को कविता में जगह देना अपने आप में नई बात थी। 'गाँव का जीवन' उनकी दूसरी बड़ी रचना है, जिसमें भारतीय गाँव की पूरी तस्वीर उतारने की कोशिश की गई है — मेहनत, गरीबी, सुख-दुख, सब कुछ। उनकी भाषा सरल है और लय सहज, इसलिए उनकी कविताएँ पढ़ते हुए किसी मुश्किल शब्द से नहीं उलझना पड़ता।
कविताएँ
- अस्तोदय की वीणा
- तिल्ली सिंह
- अन्वेषण
- आगे बढ़े चलेंगे
- पुष्प विकास
- वह देश कौन सा है
- कामना
- निशीथ-चिंता
- हे प्रभो आनन्ददाता ज्ञान हमको दीजिए
- अतुलनीय जिनके प्रताप का
बाल कविताएँ
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