लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएँ : Maithilisharan Gupt Rachnayein

2026-11-05 · हिंदी कविता / Hindi Poetry / Kavya Khand

मैथिलीशरण गुप्त हिंदी साहित्य के उन गिने-चुने कवियों में हैं जिन्हें महात्मा गांधी ने स्वयं 'राष्ट्रकवि' कहा। उनका जन्म झाँसी के चिरगाँव में हुआ, और घर पर ही संस्कृत, हिंदी तथा बांग्ला साहित्य का गहरा अध्ययन किया। वे खड़ी बोली हिंदी के पहले बड़े कवि माने जाते हैं — जब अधिकांश कविता ब्रजभाषा में होती थी, तब उन्होंने जनभाषा में लिखकर रास्ता बनाया। 'भारत-भारती' उनकी वह रचना है जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों में पूरे देश को झकझोर दिया; 'साकेत' में उन्होंने रामकथा को नए दृष्टिकोण से लिखा और उर्मिला को केंद्र में रखा — यह उनका सबसे बड़ा महाकाव्य है। 'यशोधरा' में बुद्ध की पत्नी की व्यथा है, 'पंचवटी' में राम-सीता-लक्ष्मण के वनवास के दिन। 'नर हो, न निराश करो मन को' और 'मनुष्यता' जैसी कविताएँ आज भी स्कूल-कॉलेज के पाठ्यक्रम में हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछी जाती हैं। उनकी कविता में देश-प्रेम, भारतीय संस्कृति और मानवता का स्वर सबसे ऊँचा है।

कविताएँ

काव्य खंड

इसी शृंखला के अन्य कवि

इन रचनाओं को भी पढ़िए

हिंदी कविताHindi Poetryकाव्य खंडKavya Khandमैथिलीशरण गुप्त की रचनाएँMaithilisharan Gupt Rachnayeinमैथिलीशरण गुप्तMaithilisharanGuptRachnayein
← सभी रचनाएँ