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मोहनलाल महतो 'वियोगी' की कविताएँ : Mohanlal Mahato Viyogi Ki Kavita

2026-11-05 · हिंदी कविता / Hindi Poetry

मोहनलाल महतो 'वियोगी' छायावादी कवि थे, और छायावाद का पूरा दौर ही भीतर की दुनिया की कविता का दौर था। उस समय कवियों ने बाहर के यथार्थ से मुँह मोड़कर मन के भीतर झाँकना शुरू किया — प्रेम, विरह, अकेलापन और अनंत की प्यास, यही उनके विषय बने। वियोगी जी की कविता का मुख्य स्वर भी विरह और भावुकता है। उनकी रचनाओं में प्रकृति और मन की व्याकुलता एक साथ बहती है — चाँद, रात, हवा और बादल सिर्फ़ दृश्य नहीं रहते, मन की हालत बन जाते हैं। यही छायावाद की पहचान है, जो प्रसाद, निराला और पंत की कविता में मिलती है। हालाँकि उनका नाम उतना नहीं लिया जाता जितना बड़े छायावादियों का, पर उस दौर की कविता को समझने के लिए ऐसे कवियों को पढ़ना ज़रूरी है — क्योंकि किसी युग की तस्वीर सिर्फ़ शिखर के नामों से पूरी नहीं होती। यहाँ उनकी उपलब्ध रचनाएँ एक जगह दी गई हैं।

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