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अम्बिका दत्त व्यास की रचनाएँ : Ambika Dutt Vyas Ki Rachna

2026-11-05 · हिंदी कविता / Hindi Poetry

अम्बिका दत्त व्यास भारतेंदु युग के कवि थे, और उस दौर की सबसे बड़ी खासियत उनकी कविता में साफ़ दिखती है — भाषा ब्रज थी, पर विषय नए थे। उन्होंने सवैया, कवित्त और कुंडलियाँ लिखीं, जो उस समय की लोकप्रिय छंद-परंपरा थी। इन छंदों की खूबी यह है कि इनमें लय बहुत तेज़ होती है और थोड़े शब्दों में बहुत बात कही जा सकती है। अम्बिका दत्त की रचनाओं में श्रृंगार और भक्ति दोनों मिलते हैं — कहीं प्रेम की कोमलता है, तो कहीं भक्ति का समर्पण। उनकी भाषा में पुरानी काव्य-परंपरा की सुगंध है, पर वे उसे दोहराते नहीं, अपने ढंग से कहते हैं। भारतेंदु युग में कविता सिर्फ़ दरबारों तक सीमित नहीं थी — वह पत्र-पत्रिकाओं और सभाओं तक पहुँच रही थी, और ऐसे कवियों की रचनाएँ उस बदलाव का हिस्सा थीं। आज जब हम भारतेंदु युग को पढ़ते हैं, तो अक्सर सिर्फ़ बड़े नाम याद रह जाते हैं। पर उस दौर की असली तस्वीर उन कवियों के बिना पूरी नहीं होती जो उसी ज़मीन पर खड़े थे। यहाँ उनके सवैये, कवित्त और कुंडलियाँ एक जगह दी गई हैं।

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