राधाचरण गोस्वामी भारतेंदु युग के उन गिने-चुने लेखकों में हैं जिन्होंने व्यंग्य को सीधा हथियार बनाया। उस दौर में अधिकांश लेखक या तो भक्ति लिख रहे थे या सामाजिक सुधार की बात कर रहे थे, पर राधाचरण ने रास्ता अलग चुना — उन्होंने अंग्रेज़ी शासन पर चोट करने के लिए कहानी का ऐसा ढाँचा बनाया जिसमें सीधा आरोप नहीं, बल्कि मज़ाक है। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना 'मूषक स्तोत्र' है, जिसमें चूहों की स्तुति की गई है। पढ़ने में यह एक मज़ेदार स्तुति लगती है, पर असल में यह उस व्यवस्था पर कटाक्ष है जो देश को खोखला कर रही थी। यही उनकी खूबी थी — कड़वी बात को हँसी के लपेट में कहना, ताकि पाठक पढ़े भी और समझे भी। इसके अलावा उन्होंने बांग्ला उपन्यासों का हिंदी अनुवाद भी किया, जिससे हिंदी गद्य को नई सामग्री मिली और पाठकों को नई दुनिया से परिचय हुआ। उस समय अनुवाद को छोटा काम नहीं माना जाता था, और राधाचरण ने यह काम गंभीरता से किया। भारतेंदु युग के बाद व्यंग्य लिखने वाले लेखकों पर उनका असर साफ़ दिखता है। यहाँ उनकी उपलब्ध रचनाएँ एक जगह दी गई हैं।
राधाचरण गोस्वामी की रचनाएँ : Radhacharan Goswami Ki Rachna
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