बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' क्रांतिकारी कवि थे, और उनका पूरा जीवन स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा रहा। वे जेल में रहे, पर वहाँ भी लिखना नहीं छोड़ा — जेल में लिखी उनकी कविताएँ उस दौर के युवाओं के लिए हौसले का स्रोत बनीं। 'कुंकुम' उनका प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है, जिसमें देश-प्रेम और संघर्ष की कविताएँ हैं। 'विद्रोही' उनकी सबसे प्रसिद्ध कविता है — इसमें जो आवाज़ है, वह सिर्फ़ राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की बेचैनी है। उनकी कविता में मज़दूर, किसान और आम आदमी की बात है, और यह बात उस दौर में नई थी जब कविता अक्सर प्रेम और सौंदर्य तक सीमित थी। भाषा उनकी सरल है, लय तेज़ है, और कविता पढ़ते हुए लगता है जैसे कोई सामने खड़ा होकर बोल रहा हो।
कविताएँ
- विद्रोही
- विप्लव गान
- क्रांति?
- हम अनिकेतन
- ओ मज़दूर किसान, उठो
- अरे तुम हो काल के भी काल
- पराजय-गीत
- एक बार तो देख
- सुनो, सुनो ओ सोनेवालो!
- राखी की सुध
- अपना मृदु गोपाल
- मंद ज्योति
- हम हैं मस्त फ़कीर
- डोले वालो
- शिखर पर
- प्रिय, जीवन-नद अपार
दोहे
इसी शृंखला के अन्य कवि
- राधाचरण गोस्वामी की रचनाएँ
- अम्बिका दत्त व्यास की रचनाएँ
- रामचरित उपाध्याय की रचनाएँ
- गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' की रचनाएँ
- रामनरेश त्रिपाठी की रचनाएँ
- सियारामशरण गुप्त की रचनाएँ
- मोहनलाल महतो 'वियोगी' की रचनाएँ
- रामेश्वर शुक्ल 'अंचल' की रचनाएँ
- शिवमंगल सिंह 'सुमन' की रचनाएँ
- रांगेय राघव की रचनाएँ
- मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएँ