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Guru Nanak Dev Sabad Sangrah : गुरु नानक देव जी के सबद शबद

2024-12-04 · शबद

गुरु नानक देव जी सिख धर्म के प्रथम गुरु और उसकी आधारभूत शिक्षाओं के प्रवर्तक थे। उनका जन्म 1469 में तलवंडी में हुआ, जिसे आज ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। उन्होंने धार्मिक भेद, जातिगत ऊँच-नीच और कर्मकांड के बजाय एक ईश्वर, सत्यपूर्ण जीवन, नाम-स्मरण और मानव-सेवा को महत्व दिया। गृहस्थ जीवन अपनाते हुए उन्होंने आध्यात्मिक साधना को दैनिक जीवन के कर्तव्यों से अलग नहीं माना।

भारत और उसके बाहर की लंबी यात्राओं के दौरान नानक देव जी ने विभिन्न धार्मिक परंपराओं के लोगों से संवाद किया। जीवन के अंतिम वर्ष उन्होंने करतारपुर में बिताए, जहाँ संगत, कीर्तन और लंगर की परंपरा को मजबूत रूप मिला। उनकी वाणी में ‘जपुजी साहिब’, ‘आसा दी वार’ और अनेक शबद शामिल हैं, जो बाद में गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हुए। उनकी कविता में आध्यात्मिक चिंतन के साथ सामाजिक संबंधों और मनुष्य के आचरण पर भी विचार मिलता है। 1539 में करतारपुर में उनका देहावसान हुआ और गुरु अंगद देव जी को उत्तराधिकारी बनाया गया।

गुरु नानक देव जी के सबद

  1. हम घरि साजन आए
  2. सभना मरणा आइआ
  3. आपे सबदु आपे नीसानु
  4. जप तप का बंधु बेड़ला
  5. धृगु जीवणु दोहागणी मुठी दूजै भाइ
  6. मनु मंदरु तनु वेस कलंदरु
  7. जोगी अंदरि जोगीआ
  8. गुड़ु करि गिआनु धिआनु करि
  9. एको सरवरु कमल अनूप
  10. इहु तनु धरती बीजु करमा करो
  11. गुणवंती सहु राविआ
  12. अंतरि वसै न बाहरि जाइ
  13. मनु हाली किरसाणी करणी
  14. रैणि गवाई सोइ कै
  15. जोगु न खिंथा जोगु न डंडै
  16. माणस जनमु दुलंभु गुरमुखि पाइआ
  17. तू सुलतानु कहा हउ मीआ
  18. हम आदमी हां इक दमी मुहलति
  19. नदरि करे ता सिमरिआ जाइ
  20. सभि रस मिठे मंनिऐ
  21. दुध बिनु धेनु पंख बिनु पंखी
  22. माइ बाप को बेटा नीका
  23. तू प्रभ दाता दानि मति पूरा
  24. अमलु करि धरती बीजु सबद करि
  25. काइआ कागदु मनु परवाणा
  26. भांडा धोइ बैसि धूपु
  27. दीवा मेरा एकु नामु
  28. करम करतूति बेलि बिसथारी
  29. मोती त मंदर ऊसरहि
  30. माता मति पिता संतोखु
  31. जेता सबदु सुरति धुनि तेती
  32. रुति आईले सरस बसंत माहि।
  33. सोई मउला जिनि जगु मउलिआ
  34. आवहु भैणे गलि मिलह
  35. विदिओ वीचारी तां परउपकारी
  36. चोरु सलाहे चीतु न भीजै

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