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समान बाई के सबद : Saman Bai Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

सीकर की समान बाई (1825–1885) राजस्थान की कृष्ण-भक्ति परंपरा की प्रसिद्ध कवयित्री थीं। वे डिंगल कवि रामनाथ कविया की पुत्री थीं और अपने भक्तिपूर्ण काव्य के कारण ‘मत्स्य री मीरा’ के नाम से जानी जाती हैं। उनके पदों में श्याम के प्रति प्रेम, विरह और दासीभाव के साथ भगवान की शरण में जाने की आकांक्षा बार-बार उभरती है।

समान बाई की रचनात्मकता केवल भक्ति पदों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने राम और कृष्ण से जुड़े प्रसंगों के साथ राजस्थानी जीवन और विवाह संस्कारों के अवसर पर गाए जाने वाले गीत भी लिखे। उनके मंगलगीतों में विवाह की विभिन्न रस्मों और लोकाचार का जीवंत चित्र मिलता है। ‘हेलो म्हारो सुणज्यो जी जगदीश’ और ‘हरि कैहर गये परसूं’ जैसे सबद उनके कृष्ण-प्रेम और विरह को सामने रखते हैं।

समान बाई के सबद और कृष्ण भक्ति पद

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