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भीखा साहब के सबद : Bheekha Sahab Ke Sabad

2026-09-21 · Shabad / Sabad / सबद

भीखा साहब निर्गुण संत परंपरा के प्रमुख संत-कवियों में माने जाते हैं। वे संत भजनदेव के शिष्य थे और उनकी साधना तथा काव्य परंपरा में गुरु-भक्ति, आत्मज्ञान, नाम-स्मरण और ईश्वर की निर्गुण उपासना को विशेष स्थान मिला। उनकी वाणी में बाहरी आडंबर के बजाय मन की शुद्धता और आत्मचिंतन पर बल दिखाई देता है।

भीखा साहब ने अपनी बात सरल लोकभाषा में कही, जिससे उनके पद और वचन सामान्य जन तक सहज रूप से पहुँच सके। उनकी रचनाओं में आध्यात्मिक अनुभव के साथ जीवन और मनुष्य के आचरण से जुड़े विचार भी मिलते हैं। संत साहित्य की परंपरा में उनकी वाणी भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के भावों को व्यक्त करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।

भीखा साहब के सबद और संत वाणी

  1. होरी सो खेलै जा के सतगुरु ज्ञान बिचार
  2. भजन तें उत्तम नाम फ़क़ीर
  3. को लखि सकै राम को नाम
  4. जो कोउ राम नाम चित धरै
  5. समुझि गहो हरिनाम
  6. करुनामय हरि करुना करिये
  7. मन तोहिं कहत कहत सठ हारे
  8. प्रीति की यह रीति बखानौ
  9. निज घर काहे न छावत मन तुम
  10. धुनि बजत गगन महँ बीना
  11. मन में आनंद फाग उठो री
  12. मन तुम छोड़हु सकल उदासी
  13. जो कोउ या बिधि हरि हिय लावै
  14. ऐसो राम कवनि बिधि जानी
  15. गुरु गोबिंद की करत आरती
  16. ए साहब तुम दीनदयाला
  17. अस करिये साहब दाया
  18. बारहमासा

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