लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

हरिदास निरंजनी के सबद : Haridas Niranjani Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

डीडवाणा से जुड़े हरिदास निरंजनी उत्तर भारत में निरंजनी संप्रदाय की स्थापना से संबंधित संत-कवि थे। उनकी वाणी में साधना के साथ हठयोग और रहस्यवाद का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। वे बाहरी धार्मिक दिखावे की अपेक्षा भीतर की चेतना और आत्मिक अनुशासन को अधिक महत्व देते थे। जीवन के निश्चित कालखंड और व्यक्तिगत विवरणों की प्रमाणिक जानकारी सीमित है, इसलिए उनके साहित्य को ही उनके विचारों को जानने का प्रमुख आधार माना जाता है।

हरिदास निरंजनी के सबद उपलब्ध हैं। ‘राम रस मीठा रे’, ‘गाफिल नींद न करिये रे’ और ‘है बलवंती माया’ जैसे पदों में नाम-स्मरण, माया से सावधानी और जाग्रत जीवन का संदेश मिलता है। उनकी वाणी में हिंदू-मुस्लिम धार्मिक भेद से ऊपर उठकर एक परम सत्ता की बात भी आती है। भाषा लोक के निकट, प्रवाहपूर्ण और साधना के गूढ़ विचारों को सीधे ढंग से रखने वाली है।

हरिदास निरंजनी के सबद

  1. संतो! खेती की रुति आई
  2. पांड़े अपनी अगनि बुझावो
  3. है बलवंती माया
  4. राम रस मीठा रे
  5. गाफिल नींद न करिये रे
  6. सोई दिन आवेगा
  7. अवधू मैं मेरा मन समझया
  8. जिवड़ा जाय कहा तूँ रहसी वे
  9. मन रे तूँ स्याणा नहीं
  10. जीवड़ा जागि न देखे लाई वे
  11. तब हम हरि गुण गावेंगे
  12. सखी हो! सांवण मास विराजै
  13. समझि देखि मन मेरा रे
  14. अवधू आसण बैसण झूठा
  15. निद्रा मारै मसत दिवानी
  16. सखि हो! गगन गरजि घन आये
  17. सजन सनेहरा वे
  18. निद्रा मांही थकी मसोसे
  19. समझि देषि कुछ नांही रे
  20. करम भरम का किया कलेवा
  21. बाबा इहै ग़रीबी झूठी
  22. संतो! मान मरोड्यां मारे रे
  23. अवधू ऐसा ग्यांन विचारा
  24. तब हरि हम कूँ जांणैंगे
  25. पांडे! कैसा भजन तुम्हारा
  26. राम असाँड़ा सांई हो
  27. राम रस ऐसा रे
  28. राम नहीं बीसरूँ हो
  29. एक हरि एक हरि
  30. दस अवतार दसूँ ए देसी
  31. राम भजन हिरदै नहीं हेत
  32. संतो! राम रजा मैं रहिए
  33. मन रे! सो साचा जूवारी
  34. हिंदू तुरक के एक खुदाई

इन रचनाओं को भी पढ़िए

शबदShabadहरिदास निरंजनी के सबदHaridas Niranjani Ke Sabadहरिदास निरंजनीHaridasNiranjaniSabad
← सभी रचनाएँ