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बुल्ला साहब के सबद : Bulla Sahib Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

बुल्ला साहब का मूल नाम बुलाकी राम बताया जाता है। वे संत यारी साहब के शिष्य थे और बावरी संत परंपरा से जुड़े रहस्यवादी कवि के रूप में जाने जाते हैं। उनके आध्यात्मिक जीवन में गुरु और आंतरिक साधना का विशेष स्थान था। आगे चलकर गुलाल साहब और संत जगजीवन जैसे संत उनके शिष्य बने। बाहरी कर्मकांड के बजाय वे मनुष्य को अपने भीतर की चेतना पहचानने और गुरु के मार्गदर्शन में साधना करने की ओर ले जाते थे।

बुल्ला साहब की उपलब्ध वाणी में सबद और दोहे प्रमुख हैं। ‘गुरु नाम मिलो सच पाया है’, ‘बटोही खोजहु क्यों नहिं आप’ और ‘दया बिनु छार सकल माया’ जैसे पदों में आत्मखोज, गुरु-ज्ञान, प्रेम और माया से विरक्ति के स्वर सुनाई देते हैं। उनके कई सबदों में अनहद नाद, सुरति और आंतरिक अनुभवों का उल्लेख मिलता है। भाषा संत परंपरा की लोकधर्मी शैली में है, जिसमें गूढ़ साधना-विचारों को प्रतीकात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है।

संत बुल्ला साहब के प्रमुख सबद एवं पद (Bulla Sahib Ke Sabad List)

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