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मंजुकेशी के सबद : Manjukeshi Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

मंजुकेशी रीतिकाल की अलक्षित कवयित्री हैं, जिनके जीवन के बारे में विस्तृत ऐतिहासिक सामग्री उपलब्ध नहीं है। उनकी पहचान मुख्यतः पदों और सबदों के माध्यम से सामने आती है। रामभक्ति उनके काव्य का केंद्रीय पक्ष है, लेकिन केवल आराधना तक उनकी रचनाएँ सीमित नहीं रहतीं। मनुष्य के आचरण, आत्मचिंतन, प्रेम, विरह और साधना से जुड़े विचार भी उनमें दिखाई देते हैं। ‘आँगन में खेलत रघुराई’ और ‘जन हित राम धरत शरीर’ जैसे पदों में राम के प्रति अनुराग का स्वर मिलता है।

मंजुकेशी की भाषा में ब्रजभाषा की काव्यात्मकता और संस्कृतनिष्ठ शब्दावली का सुंदर मेल है। कहीं वे मन को अपने भीतर झाँकने की सीख देती हैं, तो कहीं राम के स्वरूप और आध्यात्मिक अनुभव पर विचार करती हैं। ‘भावुक, भावमय भगवान’ तथा ‘राम-रहस के ते अधिकारी’ जैसे सबद उनके चिंतनशील पक्ष को सामने लाते हैं। उपलब्ध साहित्य के आधार पर उन्हें रीतिकाल की उन कम चर्चित कवयित्रियों में रखा जा सकता है, जिनकी रचनाएँ शोध की दृष्टि से विशेष रुचिकर हैं।

मंजुकेशी के प्रमुख सबद एवं पद सूची (List of Sabad)

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