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फूलीबाई के सबद : Phoolibai Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

फूलीबाई (1568–1646) राजस्थान की संत-कवयित्री थीं, जिनका संबंध नागौर क्षेत्र के किसान परिवार से बताया जाता है। उन्होंने साधारण लोकभाषा में ऐसे आध्यात्मिक विचार रखे जिन्हें सामान्य व्यक्ति भी आसानी से समझ सके। उनके लिए बाहरी आडंबर से अधिक गुरु का ज्ञान, राम-स्मरण और मन की निर्मलता मायने रखती थी। देह की क्षणभंगुरता और सांसारिक मोह से सावधान करने वाली उनकी उक्तियों में निर्भीकता भी दिखाई देती है।

‘जब लग स्वांस सरीर में’, ‘फूली सतगुर उपरै’ और ‘सब घट मांहि राम है’ जैसी रचनाओं में जीवन की नश्वरता, सद्गुरु की महिमा और ईश्वर की सर्वव्यापकता सामने आती है। उनकी भाषा में राजस्थानी लोकबोली का रंग है, जिसके कारण आध्यात्मिक बात भी उपदेशात्मक होने के बजाय सीधे जीवन से जुड़ी हुई लगती है।

फूलीबाई जी के सबद

  1. जब मन होवे माया का
  2. झीणों मारग ग्यान रो
  3. भाइयां सिमरण करो सवाया
  4. आज आतम राम पाया
  5. सब घट मांहि राम है
  6. मैं तो अमर देस री वासी
  7. बीत गया सो ठीक है
  8. राम रस भीजगी मैं भूलगी संसार
  9. रामजी सुन ज्यो म्हारी बात
  10. राम सांच जग झूठ है
  11. राम नाम का मिणका कीजै

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