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चरनदास जी के सबद : Charandas Ji Ke Sabad

2026-09-21 · Shabad / Sabad / सबद

चरनदास (1706–1785) राजस्थान की संत परंपरा के प्रमुख संत-कवि और चरणदासी संप्रदाय के प्रवर्तक थे। उनका जन्म अलवर क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने भक्ति, आत्मज्ञान और सदाचार को अपने आध्यात्मिक विचारों का आधार बनाया। उनकी शिक्षाओं में गुरु की महिमा, नाम-स्मरण, वैराग्य और मन की शुद्धता पर विशेष बल मिलता है। चरनदास ने अपनी वाणी में आध्यात्मिक साधना के साथ मनुष्य के आचरण और जीवन-मूल्यों से जुड़े विषयों को भी सरल भाषा में व्यक्त किया। उनके अनुयायियों से आगे चलकर चरणदासी संप्रदाय का विस्तार हुआ और इस परंपरा में संत-काव्य की समृद्ध धारा विकसित हुई। उनकी रचनाएँ हिंदी संत साहित्य में भक्ति और ज्ञान के समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं।

चरनदास जी के सबद

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