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Ayodhya Singh Upadhyay Kavita : अयोध्या सिंह उपाध्याय की कविताएँ

2024-12-10 · हिंदी कविता

अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध का परिचय

द्विवेदी युग के मूर्धन्य साहित्यकार और खड़ी बोली हिंदी के प्रथम महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जन्म 15 अप्रैल 1865 को निजामाबाद (आजमगढ़), उत्तर प्रदेश में हुआ था तथा 16 मार्च 1947 को उनका देहावसान हुआ। उन्होंने ब्रजभाषा के साथ-साथ परिष्कृत संस्कृतनिष्ठ और मुहावरेदार ठेठ हिंदी दोनों शैलियों में युगप्रवर्तक साहित्य की रचना की। उनकी कालजयी कृति 'प्रियप्रवास' को खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य होने का गौरव प्राप्त है; इसके अतिरिक्त 'वैदेही वनवास', 'पारिजात', 'चोखे चौपदे' और 'चुभते चौपदे' उनकी अमर रचनाएँ हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन के दो बार सभापति रहे हरिऔध जी को 'प्रियप्रवास' के लिए प्रतिष्ठित मंगलाप्रसाद पारितोषिक तथा 'विद्यावाचस्पति' की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया था।

जीवन और साहित्यिक परिचय

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