पंडित श्रीधर पाठक का परिचय
आधुनिक हिंदी काव्य में स्वच्छंदतावाद (Romanticism) के प्रवर्तक एवं प्रकृति-सौंदर्य के अमर गायक पंडित श्रीधर पाठक का जन्म 11 जनवरी 1859 को जोधरी (आगरा), उत्तर प्रदेश में हुआ था तथा 13 सितंबर 1928 को प्रयागराज में उनका निधन हुआ। द्विवेदी युग के प्रमुख स्तंभ रहे पाठक जी ने ब्रजभाषा की पारंपरिक जड़ता को तोड़कर खड़ी बोली हिंदी को स्वाभाविक माधुर्य, प्रकृति-चित्रण और राष्ट्रप्रेम का सशक्त माध्यम बनाया। उनकी प्रमुख मौलिक कृतियों और प्रसिद्ध अनुवादों में 'कश्मीर सुषमा', 'वनाष्टक', 'भारत गीत', 'एकांतवासी योगी' और 'शांत पथिक' विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। हिंदी भाषा और साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति पद सहित 'कविभूषण' की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया था।
श्रीधर पाठक की प्रसिद्ध बाल कविताएँ एवं अन्य रचनाएँ
- तोते पढ़ो / श्रीधर पाठक
- तीतर / श्रीधर पाठक
- देल छे आए / श्रीधर पाठक
- उठो भई उठो / श्रीधर पाठक
- कुक्कुटी / श्रीधर पाठक
- गुड्डी लोरी / श्रीधर पाठक
- कोयल / श्रीधर पाठक
- मोर / श्रीधर पाठक
- चकोर / श्रीधर पाठक
- मैना / श्रीधर पाठक
- निज स्वदेश ही / श्रीधर पाठक
- बलि-बलि जाऊँ / श्रीधर पाठक
- हिंद-महिमा / श्रीधर पाठक
- स्मरणीय भाव / श्रीधर पाठक
- देश-गीत / श्रीधर पाठक
- सुंदर भारत / श्रीधर पाठक
- स्वदेश-विज्ञान / श्रीधर पाठक
- स्वराज-स्वागत-1 / श्रीधर पाठक