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नून मीम राशिद की ग़ज़लें : Noon Meem Rashid Ghazal

2024-12-08 · ग़ज़ल / शायरी / नज़्म

नून मीम राशिद (1910–1975), जिनका असली नाम नज़र मुहम्मद राशिद था, आधुनिक उर्दू कविता के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनका जन्म पंजाब के अलीपुर चट्ठा में हुआ और उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर से अर्थशास्त्र में एम.ए. किया। उनकी पहली कविता ‘जुरअत-ए-परवाज़’ 1932 में प्रकाशित हुई और 1940 में उनका पहला कविता-संग्रह ‘मावरा’ सामने आया।

राशिद ने उर्दू कविता में आज़ाद नज़्म को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद के वर्षों में वे ऑल इंडिया रेडियो, वॉइस ऑफ अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से भी जुड़े रहे। ‘ईरान में अजनबी’, ‘ला-मसावी इंसान’ और ‘गुमान का मुमकिन’ उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं। 1973 में वे इंग्लैंड चले गए और 1975 में लंदन में उनका निधन हुआ।

नून मीम राशिद की चुनिंदा नज़्म और ग़ज़लें (Selected Ghazals & Nazm of Noon Meem Rashid)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ नून मीम राशिद की ग़ज़लें हैं — ‘हसरत-ए-इंतिज़ार-ए-यार न पूछ’, ‘जो बे-सबात हो उस सरख़ुशी को क्या कीजे’, ‘Jo be-sabaat ho us sarKHushi ko kya kije’, ‘तिरे करम से ख़ुदाई में यूँ तो क्या न मिला’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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