जौन एलिया (1931–2002) आधुनिक उर्दू के प्रमुख शायर थे, जिनका जन्म अमरोहा, उत्तर प्रदेश में हुआ और बाद में वे पाकिस्तान चले गए। उनकी शायरी में प्रेम, अकेलापन, उदासी, विद्रोह और दार्शनिक चिंतन की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है।उनकी प्रमुख कृतियों में ‘शायद’, ‘यानी’, ‘गुमान’, ‘लेकिन’ और ‘गोया’ शामिल हैं। सहज लेकिन तीखे अंदाज़, आत्मसंघर्ष और पारंपरिक शायरी से अलग तेवर के कारण वे आधुनिक उर्दू शायरी के अत्यंत लोकप्रिय शायर बने।उन्हें साहित्य के क्षेत्र में प्राइड ऑफ परफॉर्मेंस से सम्मानित किया गया। उनकी पहली काव्य-कृति शायद 1991 में प्रकाशित हुई, जबकि उनकी कई अन्य कृतियाँ मरणोपरांत प्रकाशित हुईं।
- रम्ज़
- सज़ा
- शायद
- दरख़्त-ए-ज़र्द
- दरीचा-हा-ए-ख़याल
- अजनबी शाम
- नाकारा
- वो
- क़ातिल
- सफ़र के वक़्त
- तआ'क़ुब
- बस एक अंदाज़ा
- मगर ये ज़ख़्म ये मरहम
- हमेशा क़त्ल हो जाता हूँ मैं
- रातें सच्ची हैं दिन झूटे हैं
- ख़ल्वत
- फ़न पारा
- लौह-ए-दाइरा