अदम गोंडवी (Adam Gondvi) हिंदी के एक बेहद चर्चित और विद्रोही जनकवि थे। अदम गोंडवी की कविताएं और ग़ज़लें गाँव, गरीब, किसान और आम आदमी की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में समाज की असमानताओं, राजनीतिक भ्रष्टाचार और व्यवस्था की विडंबनाओं पर गहरी चोट की है। उनकी भाषा सहज, बोलचाल के करीब और सीधे असर करने वाली थी। अगर आप जन सरोकार का साहित्य पढ़ना पसंद करते हैं, तो इस पृष्ठ पर अदम गोंडवी की प्रमुख कविताओं और ग़ज़लों का संग्रह (Adam Gondvi Poems in Hindi) पढ़ सकते हैं।
अदम गोंडवी की रचनाएँ और ग़ज़ल संग्रह
धरती की सतह पर (Dharti Ki Satah Par)
- मानवता का दर्द लिखेंगे, माटी की बू-बास लिखेंगे / ग़ज़ल
- ये महाभारत है जिसके पात्र सारे आ गए / ग़ज़ल
- विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्यास लिखा है / कविता
- जिसके सम्मोहन में पाग़ल, धरती है, आकाश भी है / ग़ज़ल
- हीरामन बेज़ार है उफ़्! किस कदर महँगाई से / ग़ज़ल
- ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी / ग़ज़ल
- टी०वी० से अख़बार तक ग़र सेक्स की बौछार हो / ग़ज़ल
- 'अदम' सुकून में जब कायनात होती है / ग़ज़ल
- ये समझते हैं, खिले हैं तो फिर बिखरना है / ग़ज़ल
- जिस्म क्या है, रुह तक सब कुछ खुलासा देखिए / ग़ज़ल
- जो 'डलहौजी' न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे / ग़ज़ल
- आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे / ग़ज़ल
- ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़ारों में / ग़ज़ल
- सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद है / ग़ज़ल
- उनका दावा, मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया / ग़ज़ल
- चाँद है ज़ेरे-क़दम, सूरज खिलौना हो गया / ग़ज़ल
- भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है / ग़ज़ल
- महल से झोंपड़ी तक एकदम घुटती उदासी है / ग़ज़ल
- पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो / ग़ज़ल
- नीलोफर सबनम नहीं अंगार की बातें करो / ग़ज़ल
- तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है / ग़ज़ल
- जिस्म की भूख कहें या हवस का ज्वार कहें / ग़ज़ल
- बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को / ग़ज़ल
- वो जिसके हाथ में छाले हैं, पैरों में बिवाई है / ग़ज़ल
- कब तक सहेंगे ज़ुल्म रफ़ीक़ो-रक़ीब के / ग़ज़ल
- बज़ाहिर प्यार को दुनिया में जो नाकाम होता है / ग़ज़ल
- न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से / ग़ज़ल
- काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में / ग़ज़ल
- जितने हरामख़ोर थे कुर्बो-जवार में / ग़ज़ल
- महज़ तनख़्वाह से निपटेंगे क्या नखरे लुगाइ के / ग़ज़ल
- भुखमरी, बेरोज़गारी, तस्करी के एहतिमाम / कविता
- एशियाई हुस्न की तस्वीर है मेरी ग़ज़ल / कविता
- जिस तरफ डालो नजर सैलाब का संत्रास है / कविता
- मैं चमारों की गली में ले चलूंगा आपको / कविता
समय से मुठभेड़ (Samay Se Muthbhed)
- बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को / ग़ज़ल
- घर में ठण्डे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है / ग़ज़ल
- ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़ारों में / ग़ज़ल
- किसको उम्मीद थी जब रौशनी जवां होगी / ग़ज़ल
- भूख के एहसास को शेरो-सुख़न तक ले चलो / ग़ज़ल
- जो उलझ कर रह गई फाइलों के जाल में / ग़ज़ल
- काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में / ग़ज़ल
- जिस्म क्या है, रुह तक सब कुछ खुलासा देखिए / ग़ज़ल
- जो 'डलहौजी' न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे / ग़ज़ल
- आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे / ग़ज़ल
- भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है / ग़ज़ल
- मैंने अदब से हाथ उठाया सलाम को / ग़ज़ल
- वह सिपाही थे न सौदागर थे न मजदूर थे / ग़ज़ल
विविध रचनाएँ (Misc. Poetry)
- आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है ज़िन्दगी / ग़ज़ल
- गर चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे / ग़ज़ल
- हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये / ग़ज़ल
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ अदम गोंडवी की ग़ज़लें हैं — ‘मानवता का दर्द लिखेंगे, माटी की बू-बास लिखेंगे / ग़ज़ल’, ‘ये महाभारत है जिसके पात्र सारे आ गए / ग़ज़ल’, ‘विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्यास लिखा है / कविता’, ‘जिसके सम्मोहन में पाग़ल, धरती है, आकाश भी है / ग़ज़ल’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।