जौन एलिया (Jaun Elia) (1931–2002) आधुनिक उर्दू शायरी के सबसे चर्चित और प्रभावशाली शायरों में गिने जाते हैं। उनका असली नाम सैयद हुसैन सिब्त-ए-असगर नक़वी था। अमरोहा में जन्मे जौन एलिया को दर्शन, तर्कशास्त्र, इतिहास और धर्म के साथ-साथ फ़ारसी और अरबी जैसी भाषाओं पर असाधारण पकड़ थी। 1957 में वे कराची (पाकिस्तान) चले गए। उनके अनूठे अंदाज़, बेबाक लहज़े और आंतरिक पीड़ा को उनकी शायरी में साफ़ महसूस किया जा सकता है।
जौन एलिया का पहला काव्य-संग्रह ‘शायद’ 1991 में प्रकाशित हुआ, जिसने शायरी प्रेमियों के बीच तहलका मचा दिया। इसके बाद ‘यानी’, ‘लेकिन’, ‘गोया’ और ‘गुमान’ जैसे महत्वपूर्ण संग्रह पाठकों के सामने आए। इस पृष्ठ पर आप जौन एलिया की मशहूर ग़ज़लें और शायरी (Jaun Elia Ghazals in Hindi & Roman) पढ़ सकते हैं।
जौन एलिया की चुनिंदा शायरी और ग़ज़लें (Selected Ghazals of Jaun Elia)
- उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या (Umr Guzregi Imtihan Mein Kya)
- नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम (Naya Ek Rishta Paida Kyun Karen Hum)
- कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे (Kitne Aish Se Rahte Honge)
- बे-क़रारी सी बे-क़रारी है (Be-Qarari Si Be-Qarari Hai)
- हालत-ए-हाल के सबब हालत-ए-हाल ही गई (Haalat-e-Haal Ke Sabab)
- बे-दिली क्या यूँही दिन गुज़र जाएँगे (Be-Dili Kya Yunhi Din Guzar Jaenge)
- ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं (Thik Hai Khud Ko Hum Badalte Hain)
- तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो (Tumhaara Hijr Mana Lun Agar Ijazat Ho)
- अपने सब यार काम कर रहे हैं (Apne Sab Yar Kaam Kar Rahe Hain)
- गाहे गाहे बस अब यही हो क्या (Gahe Gahe Bas Ab Yahi Ho Kya)
- सर ही अब फोड़िए नदामत में (Sar Hi Ab PhoDiye Nadamat Mein)
- तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो (Tum Haqiqat Nahin Ho Hasrat Ho)
- इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं (Ek Hunar Hai Jo Kar Gaya Hun Main)
- अभी इक शोर सा उठा है कहीं (Abhi Ek Shor Sa UTha Hai Kahin)
- एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है (Ek Hi Muzhda Subh Lati Hai)
- बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या (Bahut Dil Ko Kushada Kar Liya Kya)
- सीना दहक रहा हो तो क्या चुप रहे कोई (Sina Dahak Raha Ho To Kya Chup Rahe Koi)
- बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं (Bada Ehsan Hum Farma Rahe Hain)
- ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया (Zabt Kar Ke Hansi Ko Bhul Gaya)
- आदमी वक़्त पर गया होगा (Aadmi Waqt Par Gaya Hoga)
- शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें (Sharmindagi Hai Hum Ko Bahut)
- किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे (Kis Se Izhaar-e-Muddaa Kije)
- तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ ये कैसी तन्हाई है (Tu Bhi Chup Hai Main Bhi Chup Hun)
- उस के पहलू से लग के चलते हैं (Uske Pahlu Se Lag Ke Chalte Hain)
- काम की बात मैं ने की ही नहीं (Kaam Ki Baat Maine Ki Hi Nahin)
- ईज़ा-दही की दाद जो पाता रहा हूँ मैं (Iza-Dahi Ki Dad Jo Pata Raha Hun Main)
- हम तो जैसे वहाँ के थे ही नहीं (Hum To Jaise Wahan Ke The Hi Nahin)
- अपना ख़ाका लगता हूँ (Apna Khaka Lagta Hun)
- आप अपना ग़ुबार थे हम तो (Aap Apna Ghubar The Hum To)
- चलो बाद-ए-बहारी जा रही है (Chalo Baad-e-Bahaari Ja Rahi Hai)
- जी ही जी में वो जल रही होगी (Ji Hi Ji Mein Wo Jal Rahi Hogi)
- दिल जो है आग लगा दूँ उस को (Dil Jo Hai Aag Laga Dun Usko)
- दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते (Dil Ki Taklif Kam Nahin Karte)
- न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं (Na Hua Nasib Qarar-e-Jaan)
- आख़िरी बार आह कर ली है (Aakhiri Bar Aah Kar Li Hai)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जौन एलिया का असली नाम क्या था?
जौन एलिया का असली नाम सैयद हुसैन सिब्त-ए-असगर नक़वी था।
जौन एलिया का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उनका जन्म 1931 में अमरोहा (उत्तर प्रदेश) में हुआ था; 1957 में वे कराची (पाकिस्तान) चले गए।
जौन एलिया के प्रमुख काव्य-संग्रह कौन-से हैं?
‘शायद’, ‘यानी’, ‘लेकिन’, ‘गोया’ और ‘गुमान’ उनके प्रमुख संग्रह हैं। ‘शायद’ 1991 में प्रकाशित हुआ था।
जौन एलिया की प्रसिद्ध ग़ज़लें कौन-सी हैं?
‘उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या’, ‘नया इक रिश्ता पैदा क्यों करें हम’ और ‘तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ’ उनकी प्रसिद्ध ग़ज़लों में शामिल हैं।
जौन एलिया किस शायरी शैली के लिए जाने जाते हैं?
जौन एलिया अपने अनूठे अंदाज़, बेबाक लहज़े और आंतरिक पीड़ा को सहज ढंग से कहने के लिए जाने जाते हैं; वे आधुनिक उर्दू शायरी के सबसे चर्चित शायरों में गिने जाते हैं।
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ जॉन एलिया की ग़ज़लें हैं — ‘उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या (Umr Guzregi Imtihan Mein Kya)’, ‘नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम (Naya Ek Rishta Paida Kyun Karen Hum)’, ‘कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे (Kitne Aish Se Rahte Honge)’, ‘बे-क़रारी सी बे-क़रारी है (Be-Qarari Si Be-Qarari Hai)’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।