मुनीर नियाज़ी (1928–2006) उर्दू और पंजाबी के प्रसिद्ध शायर, कवि और गीतकार थे। उनका जन्म होशियारपुर, पंजाब में हुआ और विभाजन के बाद वे पाकिस्तान चले गए। उनकी शायरी में अकेलापन, उदासी, स्मृति, प्रेम और रहस्यमय वातावरण की अनूठी अभिव्यक्ति मिलती है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘तेज़ हवा और तन्हा फूल’, ‘जंगल में धनक’, ‘दुश्मनों के दरमियान शाम’ और ‘माह-ए-मुनीर’ शामिल हैं। ‘हमेशा देर कर देता हूँ’, ‘कुछ बातें अनकही रहने दो’ और ‘आवाज़ दे के देख लो’ उनकी लोकप्रिय रचनाओं में हैं। उनकी विशिष्टता बिंबात्मक, रहस्यमय और भावपूर्ण भाषा में साधारण जीवन के अनुभवों को गहरी संवेदना के साथ व्यक्त करने में है। उन्हें प्राइड ऑफ परफॉर्मेंस (1992), कमाल-ए-फ़न पुरस्कार (2002) और सितारा-ए-इम्तियाज़ (2005) सहित कई सम्मान मिले।
- हमेशा देर कर देता हूँ
- मोहब्बत अब नहीं होगी
- सपना आगे जाता कैसे
- कुछ बातें अन-कही रहने दो
- विसाल की ख़्वाहिश
- अब मैं उसे याद बना देना चाहता हूँ
- दूरी
- आख़िरी उम्र की बातें
- ख़ूब-सूरत ज़िंदगी को हम ने कैसे गुज़ारा
- मैं और मेरा ख़ुदा
- एक लड़की
- पहली बात ही आख़िरी थी
- इक और घर भी था मिरा
- हक़ीक़त
- सदा ब-सहरा
- जादूगर
- मैं और वो
- ख़लिश
- इन लोगों से ख़्वाबों में मिलना ही अच्छा रहता है
- मैं और शहर
- वतन में वापसी
- ख़्वाहिश के ख़्वाब
- मैं, वो और रात
- अपने शहर के लिए दुआ
- दुश्मन की तरफ़ दोस्ती का हाथ
- मैं
- मैं और बादल
- अपने घर में
- तू
- कल्पना
- दुश्मनों के दरमियान शाम
- मौसम-ए-सरमा की बारिश का ये पहला रोज़ है
- इशारे