वसीम बरेलवी (जन्म 1940) उर्दू के प्रसिद्ध शायर और ग़ज़लकार हैं। उनका वास्तविक नाम ज़ाहिद हसन है और उनका जन्म बरेली, उत्तर प्रदेश में हुआ। वे लंबे समय तक उर्दू साहित्य के अध्यापक रहे और मुशायरों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।उनकी प्रमुख कृतियों में ‘तबस्सुम-ए-ग़म’, ‘मिज़ाज’, ‘आँखों आँखों रहे’, ‘मौसम अंदर-बाहर के’ और ‘मेरा क्या’ शामिल हैं। उनकी शायरी में प्रेम, मानवीय संबंधों, जीवन के अनुभवों और सामाजिक संवेदनाओं की सहज अभिव्यक्ति मिलती है।उनकी विशिष्टता सरल, संवादधर्मी भाषा और ग़ज़ल में गहरी मानवीय अनुभूति को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने में है। उन्हें फ़िराक़ गोरखपुरी अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई साहित्यिक सम्मान प्राप्त हुए हैं।
- ख़्वाब नहीं देखा है
- दीवाने की जन्नत
- तेरी याद
- एक नज़्म
- खिलौना
- अदना सा बासी
- वह जानते ही नहीं
- बेबसी
- शहर मेरा
- अमानत