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शहरयार की नज़्में : Shaharyar Ki Nazm Hindi (Shahryar)

2026-09-09 · नज़्म

शहरयार (1936–2012) आधुनिक उर्दू के प्रमुख शायर और गीतकार थे। उनका वास्तविक नाम अख़लाक़ मोहम्मद ख़ान था और वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उर्दू के प्रोफ़ेसर एवं विभागाध्यक्ष रहे।
उनकी प्रमुख कृतियों में ‘इस्म-ए-आज़म’, ‘ख़्वाब का दर बंद है’, ‘शाम होने वाली है’ और ‘मिलता रहूँगा ख़्वाब में’ शामिल हैं। फ़िल्म ‘उमराव जान’ की ग़ज़लों—‘दिल चीज़ क्या है’, ‘इन आँखों की मस्ती’—से उन्हें व्यापक लोकप्रियता मिली।
उनकी शायरी की विशेषता आधुनिक जीवन की संवेदनाओं, प्रेम और मानवीय अनुभूतियों को सरल एवं प्रभावशाली भाषा में व्यक्त करना है। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार (1987) और ज्ञानपीठ पुरस्कार (2008) से सम्मानित किया गया।

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