जाँ निसार अख़्तर (1914–1976) उर्दू के प्रसिद्ध शायर और गीतकार थे। वे प्रगतिशील उर्दू शायरी के प्रमुख रचनाकारों में गिने जाते हैं और उनकी शायरी में प्रेम, सामाजिक चेतना तथा मानवीय संवेदनाओं के स्वर प्रमुख हैं।
उनकी प्रमुख कृतियों में ‘ख़ाक-ए-दिल’, ‘पिछले पहर’ और ‘घर आँगन’ शामिल हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार (1976) उनकी काव्य-कृति ख़ाक-ए-दिल के लिए मरणोपरांत प्रदान किया गया; वे प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख़्तर के पिता थे।
- आख़िरी मुलाक़ात
- ख़ामोश आवाज़
- आख़िरी लम्हा
- तजज़िया
- ख़ाक-ए-दिल
- गर्ल्स कॉलेज की लारी
- रौशनियाँ
- आलम कितने
- हम एक हैं
- हसीं आग
- ज़िंदगी
- हव्वा की बेटी
- मज़दूर औरतें
- इत्तिहाद
- लौह-ए-मज़ार
- बगूला
- मौहूम अफ़्साने