परवीन शाकिर (1952–1994) पाकिस्तान की प्रसिद्ध उर्दू शायरा, लेखिका और शिक्षाविद् थीं। उनकी शायरी में प्रेम, स्त्री-मन, अकेलेपन, रिश्तों और सामाजिक जीवन के अनुभवों की सहज एवं संवेदनशील अभिव्यक्ति मिलती है।उनकी प्रमुख कृतियों में ‘ख़ुशबू’, ‘सद-बर्ग’, ‘ख़ुद-कलामी’, ‘इंकार’ और ‘माह-ए-तमाम’ शामिल हैं। उनकी विशिष्टता उर्दू शायरी में स्त्री के अनुभवों और भावनाओं को अपनी अलग, आधुनिक आवाज़ देने में मानी जाती है।उन्हें आदमजी साहित्यिक पुरस्कार (1976) और प्राइड ऑफ परफॉर्मेंस (1990) से सम्मानित किया गया। 1994 में एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हुआ।
- इतना मालूम है!
- आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी
- ज़िद
- लेकिन बड़ी देर हो चुकी थी
- ए'तिराफ़
- आईना
- एक्सटेसी
- मुझे मत बताना
- निक-नेम
- सिर्फ़ एक लड़की
- ख़्वाब
- चाँद रात
- एक दोस्त के नाम
- जुदाई की पहली रात
- मशवरा
- अोथेलो
- वही नर्म लहजा
- ड्यूटी
- फ़बेअय्ये आलाए रब्बिकमा तुकज़्ज़िबान
- वाहिमा
- वो बाग़ में मेरा मुंतज़िर था
- ख़ुद से मिलने की फ़ुर्सत किसे थी
- ताज-महल
- बुलावा
- पज़ीराई
- गए जनम की सदा
- एक मंज़र
- सलाम
- कंगन बेले का
- नहीं मेरा आँचल मैला है
- मसअला
- नाटक
- नए साल की पहली नज़्म
- हवा जाम-ए-सेहत तज्वीज़ करती है
- ज़ूद-पशीमान
- जिज़्या
- तक़य्या
- शुगून
- फ़रोग़ फ़रख़-ज़ाद के लिए एक नज़्म