अहमद फ़राज़ (1931–2008) उर्दू के प्रसिद्ध शायर और आधुनिक उर्दू शायरी के प्रमुख हस्ताक्षरों में गिने जाते हैं। उनका वास्तविक नाम सैयद अहमद शाह था और उनका जन्म कोहाट, ब्रिटिश भारत में हुआ था।उनकी शायरी में प्रेम, विरह, सामाजिक सरोकार और राजनीतिक प्रतिरोध के स्वर प्रमुख हैं। ‘रंजिश ही सही’, ‘अब के हम बिछड़े’ और ‘सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं’ उनकी लोकप्रिय ग़ज़लों में शामिल हैं; उन्हें सितारा-ए-इम्तियाज़ और हिलाल-ए-इम्तियाज़ सहित कई सम्मान मिले।
- भली सी एक शक्ल थी
- मुझ से पहले
- वापसी
- मुहासरा
- ये मेरी ग़ज़लें ये मेरी नज़्में
- ख़्वाबों के ब्योपारी
- मत क़त्ल करो आवाज़ों को
- दोस्ती का हाथ
- हच-हाईकर
- ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
- अगर ये सब कुछ नहीं
- ईद-कार्ड
- ऐ मेरे सारे लोगो
- अभी हम ख़ूबसूरत हैं
- शहर-नामा
- हमदर्द
- मैं और तू
- सरहदें
- कर गए कूच कहाँ
- कनीज़
- तो बेहतर है यही
- ऐ मेरे वतन के ख़ुश-नवाओ
- इंतिसाब
- पहली आवाज़
- मुजस्समा
- नामा-ए-जानाँ
- काली दीवार
- ऐ मिरे बे-दर्द शहर
- सवाल
- मयूरका
- बन-बास की एक शाम
- ज़ेर-ए-लब
- तख़्लीक़
- तज़मीन
- बन-बास
- सफ़ेद छड़ियाँ
- तसलसुल
- दीवार-ए-गिर्या
- ऐ निगार-ए-गुल
- किरदार
- गुल-शुदा शम'ओं का मातम न करो