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साहिर लुधियानवी की ग़ज़लें – Sahir Ludhianvi Ghazal

2024-12-04 · ग़ज़ल / शायरी

साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi) (1921–1980) आधुनिक उर्दू शायरी और हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली शायर, प्रगतिशील कवि और गीतकार थे। उनका वास्तविक नाम अब्दुल हई था और उनका जन्म 8 मार्च 1921 को लुधियाना (पंजाब) में हुआ। कॉलेज के दिनों में ही उनकी कालजयी नज़्मों और ग़ज़लों ने अदबी दुनिया का ध्यान खींचा। 1943 में वे लाहौर गए, जहाँ उनका ऐतिहासिक कविता संग्रह ‘तल्ख़ियाँ’ प्रकाशित हुआ और वे ‘अदब-ए-लतीफ़’, ‘शाहकार’ व ‘सवेरा’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के संपादन से जुड़े। इसी दौरान वे प्रगतिशील लेखक आंदोलन (Progressive Writers' Movement) के प्रमुख स्तंभ बने।

1949 में मुंबई आकर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपने गीतों से नया इतिहास रचा। ‘नौजवान’ और ‘बाज़ी’ से शुरू होकर ‘प्यासा’, ‘ताजमहल’, ‘कभी कभी’ और ‘त्रिशूल’ जैसी फ़िल्मों के लिए उन्होंने अविस्मरणीय गीत लिखे। ‘ताजमहल’ और ‘कभी कभी’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला तथा 1971 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘तल्ख़ियाँ’ और ‘आओ कि कोई ख़्वाब बुनें’ शामिल हैं। नीचे साहिर लुधियानवी की लोकप्रिय ग़ज़लों, नज़्मों और गीतों की संपूर्ण अनुक्रमणिका (TOC) दी गई है।

साहिर लुधियानवी की लोकप्रिय ग़ज़लें एवं नज़्में (Sahir Ludhianvi Poetry & Ghazal Collection)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

साहिर लुधियानवी कौन थे?

साहिर लुधियानवी (1921–1980) लुधियाना से थे और फ़िल्मी गीतकार के रूप में भी उतने ही बड़े थे जितने शायर के रूप में। “मैं पल दो पल का शायर हूँ” उनकी अपनी ही शायरी की सबसे सच्ची पहचान है।

साहिर लुधियानवी की सबसे मशहूर ग़ज़ल कौन सी है?

“साहिर लुधियानवी की लोकप्रिय ग़ज़लें एवं नज़्में (Sahir Ludhianvi Poetry & Ghazal Collection)” उनकी सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली ग़ज़ल है, जो इस पन्ने पर पूरी दी गई है।

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इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ साहिर लुधियानवी की ग़ज़लें हैं — ‘कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया’, ‘ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा’, ‘मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया’, ‘तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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