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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की ग़ज़लें: Faiz Ahmad Faiz Ghazal in Hindi

2026-10-03 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

परिचय

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ उर्दू के सबसे मक़बूल शायरों में हैं, जिनकी शायरी में इश्क़ और इंक़लाब दोनों एक साथ चलते हैं।

सियालकोट (पंजाब) में जन्मे फ़ैज़ तरक़्क़ी-पसंद तहरीक के अहम नाम थे, और ‘हम देखेंगे’ जैसी उनकी नज़्में आज भी ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ बनती हैं।

1951 के रावलपिंडी षड्यंत्र केस में उन्हें जेल जाना पड़ा, और उनके संग्रह ‘दस्त-ए-सबा’ और ‘ज़िंदान-नामा’ वहीं की देन हैं।

1962 में वे लेनिन पीस प्राइज़ पाने वाले पहले एशियाई शायर बने; यहाँ पढ़िए फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की चुनिंदा ग़ज़लें।

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

वीराँ है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़र उदास हैं तुम क्या गए कि रूठ गए दिन बहार के

इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन देखे हैं हम ने हौसले पर्वरदिगार के

दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के

भूले से मुस्कुरा तो दिए थे वो आज ‘फ़ैज़’ मत पूछ वलवले दिल-ए-ना-कर्दा-कार के

donon jahan teri mohabbat mein haar ke

donon jahan teri mohabbat mein haar ke wo ja raha hai koi shab-e-gham guzar ke

viran hai mai-kada KHum-o-saghar udas hain tum kya gae ki ruTh gae din bahaar ke

ek fursat-e-gunah mili wo bhi chaar din dekhe hain hum ne hausle parwardigar ke

duniya ne teri yaad se begana kar diya tujh se bhi dil-fareb hain gham rozgar ke

bhule se muskura to diye the wo aaj ‘faiz’ mat puchh walwale dil-e-na-karda-kar ke

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की ग़ज़लें

Faiz Ahmad Faiz Ghazal in English Or Roman 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की सबसे मशहूर ग़ज़ल कौन सी है?

“दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के” उनकी सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली ग़ज़ल है, जो इस पन्ने पर पूरी दी गई है।

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की ग़ज़लें किस भाषा में पढ़ी जा सकती हैं?

इस पन्ने पर ग़ज़लें देवनागरी में हैं, और कुछ ग़ज़लें रोमन में भी दी गई हैं ताकि गुनगुनाना आसान हो।

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की और ग़ज़लें कहाँ मिलेंगी?

ग़ज़ल शायरी संग्रह में 80 शायरों की ग़ज़लें एक जगह हैं, वहाँ से आप आगे पढ़ सकते हैं।

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की ग़ज़लें हैं — ‘दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के’, ‘गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले’, ‘आए कुछ अब्र कुछ शराब आए’, ‘हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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