परिचय
जावेद अख़्तर का जन्म ग्वालियर में हुआ, और वे उर्दू शायरी की सात पुश्तों वाली अदबी परंपरा से आते हैं—उनके वालिद जान निसार अख़्तर और मामू मजाज़, दोनों बड़े शायर थे।
फ़िल्मों में उन्होंने पहले सलीम-जावेद की जोड़ी के तौर पर ‘ज़ंजीर’, ‘दीवार’ और ‘शोले’ जैसी स्क्रिप्टें लिखीं, और बाद में गीतकार के रूप में भी नाम कमाया।
उनका पहला शायरी-संग्रह ‘तरक़श’ (1995) बहुत लोकप्रिय हुआ, और 2013 में उन्हें ‘लावा’ के लिए साहित्य अकादमी अवॉर्ड मिला।
उनके गीत और ग़ज़लें आज भी युवाओं की ज़ुबान पर हैं; यहाँ पढ़िए जावेद अख़्तर की चुनिंदा ग़ज़लें।
तुम को देखा तो ये ख़याल आया
तुम को देखा तो ये ख़याल आया ज़िंदगी धूप तुम घना साया
आज फिर दिल ने इक तमन्ना की आज फिर दिल को हम ने समझाया
तुम चले जाओगे तो सोचेंगे हम ने क्या खोया हम ने क्या पाया
हम जिसे गुनगुना नहीं सकते वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया
tumko dekha to ye KHayal aaya
tum ko dekha to ye KHayal aaya zindagi dhup tum ghana saya
aaj phir dil ne ek tamanna ki aaj phir dil ko hum ne samjhaya
tum chale jaoge to sochenge hum ne kya khoya hum ne kya paya
hum jise gunguna nahin sakte waqt ne aisa git kyun gaya
जावेद अख़्तर की ग़ज़लें
- तुम को देखा तो ये ख़याल आया
- जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
- तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ
- जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो
- कभी कभी मैं ये सोचता हूँ कि मुझ को तेरी तलाश क्यूँ है
- वो ज़माना गुज़र गया कब का
- याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा
- मुझ को यक़ीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थीं
- ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
- बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का
- फिरते हैं कब से दर-ब-दर अब इस नगर अब उस नगर इक दूसरे के हम-सफ़र मैं और मिरी आवारगी
- अभी ज़मीर में थोड़ी सी जान बाक़ी है
- हमारे शौक़ की ये इंतिहा थी
- ये तसल्ली है कि हैं नाशाद सब
- दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
- ये दुनिया तुम को रास आए तो कहना
- शहर के दुकाँ-दारो कारोबार-ए-उल्फ़त में सूद क्या ज़ियाँ क्या है तुम न जान पाओगे
- आज मैं ने अपना फिर सौदा किया
- कल जहाँ दीवार थी है आज इक दर देखिए
- दर्द अपनाता है पराए कौन
Javed Akhtar Ghazal
- tumko dekha to ye KHayal aaya
- jidhar jate hain sab jaana udhar achchha nahin lagta
- tamanna phir machal jae agar tum milne aa jao
- jina mushkil hai ki aasan zara dekh to lo
- kabhi kabhi main ye sochta hun ki mujhko teri talash kyun hai
- wo zamana guzar gaya kab ka
- yaad use bhi ek adhura afsana to hoga
- mujhko yaqin hai sach kahti thin jo bhi ammi kahti thin
- zara mausam to badla hai magar peDon ki shaKHon par nae patton ke aane mein abhi kuchh din lagenge
- bahana DhunDte rahte hain koi rone ka
- phirte hain kab se dar-ba-dar ab is nagar ab us nagar ek dusre ke ham-safar main aur meri aawargi
- abhi zamir mein thoDi si jaan baqi hai
- hamare shauq ki ye intiha thi
- ye tasalli hai ki hain nashad sab
- dard ke phul bhi khilte hain bikhar jate hain
- ye duniya tumko ras aae to kahna
- shahr ke dukan-daro karobar-e-ulfat mein sud kya ziyan kya hai tum na jaan paoge
- aaj maine apna phir sauda kiya
- kal jahan diwar thi hai aaj ek dar dekhiye
- dard apnata hai parae kaun
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जावेद अख़्तर की सबसे मशहूर ग़ज़ल कौन सी है?
“तुम को देखा तो ये ख़याल आया” उनकी सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली ग़ज़ल है, जो इस पन्ने पर पूरी दी गई है।
जावेद अख़्तर की ग़ज़लें किस भाषा में पढ़ी जा सकती हैं?
इस पन्ने पर ग़ज़लें देवनागरी में हैं, और कुछ ग़ज़लें रोमन में भी दी गई हैं ताकि गुनगुनाना आसान हो।
जावेद अख़्तर की और ग़ज़लें कहाँ मिलेंगी?
ग़ज़ल शायरी संग्रह में 80 शायरों की ग़ज़लें एक जगह हैं, वहाँ से आप आगे पढ़ सकते हैं।
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ जावेद अख्तर की ग़ज़लें हैं — ‘तुम को देखा तो ये ख़याल आया’, ‘जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता’, ‘तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ’, ‘जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।