राहत इंदौरी (Rahat Indori) (1950–2020) आधुनिक उर्दू शायरी के शीर्ष हस्ताक्षर, प्रख्यात कवि और बॉलीवुड गीतकार थे। उनका मूल नाम राहतुल्लाह था और उनका जन्म इंदौर (मध्य प्रदेश) में हुआ। अपने बेबाक अंदाज़ और क्रांतिकारी लहज़े के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. राहत इंदौरी की मशहूर ग़ज़लों, अश'आर और शायरी का संपूर्ण संग्रह यहाँ क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत है।
राहत इंदौरी की प्रसिद्ध ग़ज़लों की सूची
- आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
- तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
- रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
- हाथ ख़ाली हैं तिरे शहर से जाते जाते
- न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
- बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
- सिर्फ़ ख़ंजर ही नहीं आँखों में पानी चाहिए
- मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो
- लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँ हैं
- कहीं अकेले में मिल कर झिंझोड़ दूँगा उसे
- बुलाती है मगर जाने का नइं
- दोस्ती जब किसी से की जाए
- मैं लाख कह दूँ कि आकाश हूँ ज़मीं हूँ मैं
- दिलों में आग लबों पर गुलाब रखते हैं
- काम सब ग़ैर-ज़रूरी हैं जो सब करते हैं
- घर से ये सोच के निकला हूँ कि मर जाना है
- अजनबी ख़्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ
- अंधेरे चारों तरफ़ साएँ साएँ करने लगे
- चराग़ों का घराना चल रहा है
- अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
- अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ
- कभी दिमाग़ कभी दिल कभी नज़र में रहो
- हौसले ज़िंदगी के देखते हैं
- रात की धड़कन जब तक जारी रहती है
- हों लाख ज़ुल्म मगर बद-दु'आ नहीं देंगे
- बैठे बैठे कोई ख़याल आया
- वो इक इक बात पे रोने लगा था
- चराग़ों को उछाला जा रहा है
- ये सर्द रातें भी बन कर अभी धुआँ उड़ जाएँ
- ज़िंदगी की हर कहानी बे-असर हो जाएगी
- सिसकती रुत को महकता गुलाब कर दूँगा
- नदी ने धूप से क्या कह दिया रवानी में
- तुम्हारे नाम पर मैं ने हर आफ़त सर पे रक्खी थी
- मोहब्बतों के सफ़र पर निकल के देखूँगा
- उसे अब के वफ़ाओं से गुज़र जाने की जल्दी थी
- सबब वो पूछ रहे हैं उदास होने का
- सब की पगड़ी को हवाओं में उछाला जाए
- जा के ये कह दे कोई शोलों से चिंगारी से
- काली रातों को भी रंगीन कहा है मैं ने
- शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राहत इंदौरी कौन थे?
राहत इंदौरी (1950–2020) इंदौर के शायर थे, और शायरी के साथ चित्रकला भी करते थे। “बुलाती है मगर जाने का नहीं” उनका सबसे मशहूर शेर है, जिसे उन्होंने ख़ुद गाकर सुनाया था।
राहत इंदौरी की सबसे मशहूर ग़ज़ल कौन सी है?
“राहत इंदौरी की प्रसिद्ध ग़ज़लों की सूची” उनकी सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली ग़ज़ल है, जो इस पन्ने पर पूरी दी गई है।
राहत इंदौरी की और ग़ज़लें कहाँ पढ़ें?
ग़ज़ल शायरी संग्रह में 80 शायरों की ग़ज़लें एक जगह हैं।
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ राहत इंदौरी की ग़ज़लें हैं — ‘आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो’, ‘तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के’, ‘रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है’, ‘हाथ ख़ाली हैं तिरे शहर से जाते जाते’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।