कैफ़ी आज़मी (Kaifi Azmi) (1919–2002) उर्दू अदब और प्रगतिशील लेखक आंदोलन के सबसे बुलंद और असरदार शायरों में से एक हैं। उनका असली नाम अतहर हुसैन रिज़वी था। 14 जनवरी 1919 को आज़मगढ़ के मिज़वां गाँव में जन्मे कैफ़ी आज़मी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के समय अपनी पढ़ाई छोड़कर खुद को स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक संघर्षों के लिए समर्पित कर दिया था। उनका पहला काव्य-संग्रह ‘झंकार’ 1943 में प्रकाशित हुआ।
कैफ़ी आज़मी ने उर्दू ग़ज़ल और नज़्म के अलावा भारतीय सिनेमा को भी ऐतिहासिक गीत, संवाद और पटकथाएँ दीं। ‘काग़ज़ के फूल’, ‘हक़ीक़त’, ‘हीर रांझा’ और ‘गर्म हवा’ उनके फ़िल्मी लेखन की अमर कृतियाँ हैं। उनके प्रसिद्ध संग्रह ‘आवारा सज्दे’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार और पद्मश्री से नवाज़ा गया। इस पृष्ठ पर आप कैफ़ी आज़मी की कालजयी ग़ज़लें और प्रसिद्ध शायरी (Kaifi Azmi Ghazals, Shayari & Nazms in Hindi) पढ़ सकते हैं।
कैफ़ी आज़मी की प्रसिद्ध शायरी और ग़ज़लें (Famous Poetry & Ghazals of Kaifi Azmi)
- तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो (Tum Itna Jo Muskura Rahe Ho) / ग़ज़ल
- झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं (Jhuki Jhuki Si Nazar) / ग़ज़ल
- मैं ढूँडता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता / ग़ज़ल
- यूँही कोई मिल गया था सर-ए-राह चलते चलते / ग़ज़ल
- इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े / ग़ज़ल
- शोर यूँही न परिंदों ने मचाया होगा / ग़ज़ल
- आज सोचा तो आँसू भर आए / ग़ज़ल
- मिले न फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली / ग़ज़ल
- क्या जाने किस की प्यास बुझाने किधर गईं / ग़ज़ल
- की है कोई हसीन ख़ता हर ख़ता के साथ / ग़ज़ल
- हाथ आ कर लगा गया कोई / ग़ज़ल
- जो वो मिरे न रहे मैं भी कब किसी का रहा / ग़ज़ल
- या दिल की सुनो दुनिया वालो या मुझ को अभी चुप रहने दो / ग़ज़ल
- सुना करो मिरी जाँ इन से उन से अफ़्साने / ग़ज़ल
- ख़ार-ओ-ख़स तो उठें रास्ता तो चले / ग़ज़ल
- पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए / ग़ज़ल
- लाई फिर एक लग़्ज़िश-ए-मस्ताना तेरे शहर में / ग़ज़ल
- बहारो मेरा जीवन भी सँवारो / ग़ज़ल
- कहीं से लौट के हम लड़खड़ाए हैं क्या क्या / ग़ज़ल
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ कैफ़ी आज़मी की ग़ज़लें हैं — ‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो (Tum Itna Jo Muskura Rahe Ho) / ग़ज़ल’, ‘झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं (Jhuki Jhuki Si Nazar) / ग़ज़ल’, ‘मैं ढूँडता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता / ग़ज़ल’, ‘यूँही कोई मिल गया था सर-ए-राह चलते चलते / ग़ज़ल’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।