शकील आज़मी हिंदी और उर्दू के जाने-माने शायर और गीतकार हैं। उनकी शायरी में प्रेम, रिश्ते, जिंदगी के अनुभव और आम इंसान की भावनाओं को सहज शब्दों में जगह मिलती है। उनके अशआर में आधुनिक जीवन की संवेदनाओं के साथ उर्दू शायरी की रवायत भी दिखाई देती है। वे फ़िल्मों के लिए गीत और संवाद लिखने के अलावा मुशायरों और साहित्यिक मंचों पर भी सक्रिय रहे हैं। इस पृष्ठ पर शकील आज़मी की चुनिंदा शायरी, ग़ज़लें और अशआर पढ़े जा सकते हैं।
शकील आज़मी की प्रसिद्ध ग़ज़लें एवं शायरी (Popular Shayari Of Shakeel Azmi)
- बात से बात की गहराई चली जाती है / शकील आज़मी ग़ज़ल
- चाँद में ढलने सितारों में निकलने के लिए / शकील आज़मी ग़ज़ल
- Ghazals of Shakeel Azmi
- धुआँ धुआँ है फ़ज़ा रौशनी बहुत कम है / शकील आज़मी ग़ज़ल
- एक सूराख़ सा कश्ती में हुआ चाहता है / शकील आज़मी ग़ज़ल
- धूप से बर-सर-ए-पैकार किया है मैं ने / शकील आज़मी ग़ज़ल
- क़दम उठे हैं तो धूल आसमान तक जाए / शकील आज़मी ग़ज़ल
- ज़िंदा रहना है तो साँसों का ज़ियाँ और सही / शकील आज़मी ग़ज़ल
- फूल का शाख़ पे आना भी बुरा लगता है / शकील आज़मी ग़ज़ल
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ शकील आज़मी की ग़ज़लें हैं — ‘बात से बात की गहराई चली जाती है / शकील आज़मी ग़ज़ल’, ‘चाँद में ढलने सितारों में निकलने के लिए / शकील आज़मी ग़ज़ल’, ‘Ghazals of Shakeel Azmi’, ‘धुआँ धुआँ है फ़ज़ा रौशनी बहुत कम है / शकील आज़मी ग़ज़ल’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।