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बशर नवाज़ की ग़ज़लें : Bashar Nawaz Ghazal

2024-12-07 · ग़ज़ल / शायरी

बशर नवाज़ (Bashar Nawaz) (1935–2015) आधुनिक उर्दू शायरी के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर, प्रसिद्ध कवि, पटकथा लेखक और गीतकार थे। उनका वास्तविक नाम बशारत नवाज़ ख़ान था और उनका जन्म औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में हुआ था। प्रगतिशील लेखक आंदोलन (Progressive Writers' Movement) से गहरे जुड़े बशर नवाज़ ने ग़ज़ल, नज़्म, रेडियो नाटक और हिंदी सिनेमा के लिए कालजयी गीत लिखे।

उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में राइगाँ और अजनबी समुंदर विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जबकि नया अदब नए मसाइल उनकी गंभीर आलोचनात्मक कृति है। फ़िल्म बाज़ार का अमर गीत ‘करोगे याद तो हर बात याद आएगी’ उनकी सबसे लोकप्रिय रचनाओं में गिना जाता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रसिद्ध धारावाहिक अमीर ख़ुसरो तथा आकाशवाणी के लिए भी उत्कृष्ट पटकथा और संवाद लिखे।

बशर नवाज़ की मशहूर ग़ज़लें (Popular Ghazals of Bashar Nawaz)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ बशर नवाज़ की ग़ज़लें हैं — ‘रोज़ कहाँ से कोई नया-पन अपने आप में लाएँगे’, ‘roz kahan se koi naya-pan apne aap mein laenge’, ‘चुप-चाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो’, ‘chup-chap sulagta hai diya tum bhi to dekho’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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