लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

विद्यापति के पद व गीत लिरिक्स | Vidyapati Padavali in Hindi

2024-12-16 · Savaiyye-kavitt-pad

परिचय

मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति (लगभग 1352–1448) मैथिली, अवहट्ठ और संस्कृत के अप्रतिम कवि, संगीतकार व पदकार थे। उनका जन्म बिहार के मिथिला क्षेत्र (मधुबनी) के बिस्फी गाँव में हुआ था। विद्यापति ने राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम, नख-शिख शृंगार के साथ-साथ शक्ति (भगवती) और शिव (नचारी व महेशवाणी) के भक्ति गीतों को अमर बना दिया। उनकी गेय पदावली और माधुर्यपूर्ण लोक-भाषा ने हिंदी व मैथिली साहित्य को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

विद्यापति के प्रसिद्ध पद और गीत

विद्यापति के दोहे एवं षटपदी

अन्य महत्वपूर्ण रचनाएँ एवं गीत संग्रह

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

विद्यापति को "मैथिल कोकिल" क्यों कहा जाता है?
विद्यापति की भाषा अत्यंत मधुर, सरस और संगीतमय थी। कोयल जैसी मीठी वाणी और सुरीले मैथिली पदों की रचना के कारण उन्हें आदर से "मैथिल कोकिल" कहा जाता है।

इन रचनाओं को भी पढ़िए

सवैया-कवित्त-पदSavaiyye Kavitt Padविद्यापति के पद व गीत लिरिक्सVidyapati Padavali in Hindiविद्यापतिVidyapatiPadavaliHindi
← सभी रचनाएँ