संत दरियाव जी (1676–1758) राजस्थान की संत परंपरा के प्रमुख संत-कवि थे। उनका जन्म पाली जिले के जैतारण में हुआ था। वे रामस्नेही संप्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक थे। यहां पढ़ें संत दरियाव जी के पद और दोहे की पूरी सूची, हर रचना का पाठ और अर्थ अलग पेज पर दिया गया है।
संत दरियाव जी के पद
- संत दरियाव जी के पद - मुख्य संग्रह - सभी पदों की सूची
- साधो ऐसी खेती करिये - जीवन रूपी खेती पर प्रसिद्ध पद
- जाके उर उपजी नहिं भाई - ज्ञान और भक्ति पर पद
- जीव बटाउ रे बहतो भाई मारग माहिं - जीव और संसार पर पद
- राम बिन भाव करम नहिं छूटै - राम भक्ति की महिमा पर पद
- साधो एक अचम्भा दीठा - आत्मज्ञान पर अचंभे वाला पद
संत दरियाव जी के दोहे
- संत दरियाव जी के दोहे - मुख्य संग्रह - सभी दोहों की सूची
- दरिया दूजा धरम सूँ - धर्म पर दोहा सहित
- दरिया दाई बाँझड़ी - प्रसिद्ध दोहा
- दरिया बहु बकवाद तज - वाणी संयम पर दोहा
- दरिया बिरही साध के - विरह भक्ति पर दोहा
- दरिया हंसा ऊजला - संत महिमा पर दोहा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: संत दरियाव जी कौन थे?
उत्तर: वे 1676-1758 में राजस्थान के प्रसिद्ध संत-कवि थे और रामस्नेही संप्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक माने जाते हैं।