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गोस्वामी हरिराय के पद : Goswami Hariray Ke Pad

2026-09-07 · Savaiyye-kavitt-pad

परिचय

गोस्वामी हरिराय जी (1590–1727) पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय के मूर्धन्य आचार्य, संत और उच्च कोटि के कृष्णभक्त कवि थे। उनका संबंध गोकुल (उत्तर प्रदेश) से था तथा उन्होंने पुष्टिमार्गीय सेवा पद्धति, भक्ति सिद्धांतों और चौरासी वैष्णवन की वार्ता के भावात्मक विस्तार में ऐतिहासिक योगदान दिया। इनकी रचनाओं में भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, वात्सल्य, भ्रमरगीत और निकुंज लीलाओं का अत्यंत सूक्ष्म व सरस वर्णन मिलता है। ब्रजभाषा के मधुर और गेय पदों के माध्यम से उन्होंने वैष्णव साहित्य को अद्वितीय समृद्धता प्रदान की।

गोस्वामी हरिराय जी के पद एवं रचनाएँ

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