लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

प्रतापबाला के पद : Pratapbala Ke Pad

2026-09-07 · Savaiyye-kavitt-pad

परिचय

प्रतापबाला (1834) जोधपुर की महारानी और कृष्णभक्त कवयित्री थीं। परिजनों की अकालमृत्यु के कारण उनके मन में संसार की नश्वरता के प्रति वैराग्य उत्पन्न हुआ और वे कृष्ण-भक्ति में लीन हो गईं। उन्होंने श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा, प्रेम और समर्पण को सरस पदों के माध्यम से व्यक्त किया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ विरह और वैराग्य के भाव भी दिखाई देते हैं। राजस्थान की कृष्णभक्ति काव्य-परंपरा में प्रतापबाला का नाम उल्लेखनीय है।

प्रतापबाला के पद एवं रचनाएँ

इन रचनाओं को भी पढ़िए

सवैया-कवित्त-पदSavaiyye Kavitt Padप्रतापबाला के पदPratapbala Ke Padप्रतापबालाPratapbala
← सभी रचनाएँ