लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

सूर्यमल्ल मीसण ( बूंदी रा राजकवि ) की रचनाएँ : Suryamalla Misan Rachna

2026-09-06 · Savaiyye-kavitt-pad

परिचय

महाकवि सूर्यमल्ल मीसण (1815–1868) राजस्थान के अमर डिंगल कवि, प्रखर इतिहासकार और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वैचारिक अग्रदूत थे। वे बूंदी रियासत के महाराव राजा रामसिंह के राजकवि थे, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से सुप्त समाज में राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान का शंखनाद किया। उनकी कालजयी कृति 'वंश भास्कर' राजस्थान के विस्तृत इतिहास व संस्कृति का महाकाव्य है, वहीं 'वीर सतसई' शौर्य और स्वाधीनता की अमर गाथा है। डिंगल और ब्रजभाषा पर असाधारण अधिकार रखने वाले सूर्यमल्ल जी को 'राजस्थान का राज्य कवि' माना जाता है।

सूर्यमल्ल मीसण की प्रमुख रचनाएँ, छंद एवं गीत

इन रचनाओं को भी पढ़िए

सवैया-कवित्त-पदSavaiyye Kavitt Padसूर्यमल्ल मीसण ( बूंदी रा राजकवि ) की रचनाएँSuryamalla Misan RachnaSuryamallaMisanRachna
← सभी रचनाएँ