परिचय
महाकवि सूर्यमल्ल मीसण (1815–1868) राजस्थान के अमर डिंगल कवि, प्रखर इतिहासकार और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वैचारिक अग्रदूत थे। वे बूंदी रियासत के महाराव राजा रामसिंह के राजकवि थे, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से सुप्त समाज में राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान का शंखनाद किया। उनकी कालजयी कृति 'वंश भास्कर' राजस्थान के विस्तृत इतिहास व संस्कृति का महाकाव्य है, वहीं 'वीर सतसई' शौर्य और स्वाधीनता की अमर गाथा है। डिंगल और ब्रजभाषा पर असाधारण अधिकार रखने वाले सूर्यमल्ल जी को 'राजस्थान का राज्य कवि' माना जाता है।
सूर्यमल्ल मीसण की प्रमुख रचनाएँ, छंद एवं गीत
- सूर्यमल्ल मीसण के छंद / Suryamalla Misan Ke Chhand
- अन्नल सुत जयसिंह देव / सूर्यमल्ल मीसण
- अग्गैं परिसर अटत करत / सूर्यमल्ल मीसण
- भूप बलवंत दुर्ग नीरमय / सूर्यमल्ल मीसण
- छंद पादाकुलकम् / सूर्यमल्ल मीसण
- छोटे बड़े सैनिक छ भेद / सूर्यमल्ल मीसण
- धकि तोपन घमचक्क / सूर्यमल्ल मीसण
- एकादसि दिन प्रात नयर / सूर्यमल्ल मीसण
- गागरोणि अचलेस सजे गढ / सूर्यमल्ल मीसण
- इत दिल्लिय कनउज्ज उभय / सूर्यमल्ल मीसण
- इत पत्तन अजमेर तजिग / सूर्यमल्ल मीसण
- जरैं अपेय अचळ जळ जाणे / सूर्यमल्ल मीसण
- झमकि सोम असि झरत / सूर्यमल्ल मीसण
- कक्षा उर सिथिल प्रलम्ब / सूर्यमल्ल मीसण
- कुमर दूत रनकाज / सूर्यमल्ल मीसण
- मधुणिभ दंत जाकै जंघन / सूर्यमल्ल मीसण
- रजनि जाम खिल रहत बज्जि / सूर्यमल्ल मीसण
- सम्भरीक खिच्ची जिण संतति / सूर्यमल्ल मीसण
- सविया दोय मुहुक्कर्मा सुत / सूर्यमल्ल मीसण
- तातारी दळ अतुळ साजि रमजान कुतुब सह / सूर्यमल्ल मीसण
- सूर्यमल्ल मीसण के गीत / Suryamalla Misan Ke Geet
- दगौ विचारै फेरियौ अंगरेजां लोगां चौगिड़द्दौ / सूर्यमल्ल मीसण
- गीत महारावराजा रामसिंघ हाडा बूंदी रौ / सूर्यमल्ल मीसण
- गीत महारावराजा रामसिंघ हाडा रा / सूर्यमल्ल मीसण
- गीत ठाकुर खुसालसिंघ आउवा रौ / सूर्यमल्ल मीसण
- वीरलोक / सूर्यमल्ल मीसण
- सूर्यमल्ल मीसण रा छप्पय / Suryamalla Misan Ra Chhappay
- असवारी उतरै दसमी पूजन नृप साजै / सूर्यमल्ल मीसण
- ब्रह्मा अर ब्रहस्पति / सूर्यमल्ल मीसण
- इम रावण ऊचरै / सूर्यमल्ल मीसण
- इंद्रजीत सुणि एम / सूर्यमल्ल मीसण
- इंद्रजीत सूं एम / सूर्यमल्ल मीसण