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सूरदास जी के पद लिरिक्स | Surdas Ji Ke Pad in Hindi

2024-11-30 · भजन / Bhajan / Savaiyye-kavitt-pad

परिचय

सूरदास जी के पदों में कृष्ण के बालरूप से लेकर ब्रज की गोपियों के विरह और कृष्ण-प्रेम तक के अनेक मनोहर प्रसंग मिलते हैं। कहीं यशोदा के सामने बालकृष्ण की भोली शिकायतें हैं, कहीं माखन चोरी और बाल-क्रीड़ाओं का चंचल रूप दिखाई देता है, तो कहीं कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद ब्रजवासियों और गोपियों की व्याकुलता मुखर होती है। ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’, ‘जसोदा हरि पालनैं झुलावै’, ‘ऊधो! तुम हौ अति बड़भागी’ और ‘अँखियाँ हरि-दरसन की भूखी’ जैसे पद सूरदास की काव्य-दृष्टि और ब्रजभाषा की मिठास को सामने रखते हैं। इस संग्रह में एन.सी.ई.आर.टी. में दिए गए पदों के साथ सूरदास जी के अन्य प्रसिद्ध पद भी एक जगह पढ़े जा सकते हैं।

सूरदास जी के लोकप्रिय पद एवं बाल-लीला संग्रह

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