परिचय
सूरदास जी के पदों में कृष्ण के बालरूप से लेकर ब्रज की गोपियों के विरह और कृष्ण-प्रेम तक के अनेक मनोहर प्रसंग मिलते हैं। कहीं यशोदा के सामने बालकृष्ण की भोली शिकायतें हैं, कहीं माखन चोरी और बाल-क्रीड़ाओं का चंचल रूप दिखाई देता है, तो कहीं कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद ब्रजवासियों और गोपियों की व्याकुलता मुखर होती है। ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’, ‘जसोदा हरि पालनैं झुलावै’, ‘ऊधो! तुम हौ अति बड़भागी’ और ‘अँखियाँ हरि-दरसन की भूखी’ जैसे पद सूरदास की काव्य-दृष्टि और ब्रजभाषा की मिठास को सामने रखते हैं। इस संग्रह में एन.सी.ई.आर.टी. में दिए गए पदों के साथ सूरदास जी के अन्य प्रसिद्ध पद भी एक जगह पढ़े जा सकते हैं।
सूरदास जी के लोकप्रिय पद एवं बाल-लीला संग्रह
- सूरदास के पद (एन.सी.ई.आर.टी.)
- मैया! हौं गाई चरावन जैहौं
- मैया मैं नहिं माखन खायो
- भजन बिनु कूकर-सूकर-जैसो
- खेलन में को काको गुसैयाँ (एन.सी.ई.आर.टी.)
- ऊधो! तुम हौ अति बड़भागी (एन.सी.ई.आर.टी.)
- आयो घोष बड़ो व्योपारी
- अति मलीन वृषभानुकुमारी
- संदेसनि मधुबन-कूप भरे
- जोग ठगौरी ब्रज न बिकैहै
- बिन गोपाल बैरनि भई कुंजैं
- निरखत अंक स्यामसुंदर के
- मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ
- हमारे हरि हारिल की लकरी
- निर्गुन कौन देस को वासी
- अँखियाँ हरि-दरसन की भूखी
- काहे को रोकत मारग सूधो
- ऊधो! कोकिल कूजल कानन
- हरि हैं राजनीति पढ़ि आए
- लरिकाई को प्रेम कहौ अलि
- काहे को गोपीनाथ कहावत
- मैया, मैं तो चंद−खिलौना लैहौं
- ऊधो! तुम हौ अति बड़भागी
- देखौ माई! कान्ह हिलकियनि रोवै
- कहन लागे मोहन मैया-मैया
- अब हौं माया-हाथ बिकानौ
- जसोदा हरि पालनैं झुलावै
- गोकुल सबै गोपाल उपासी
- आए जोग सिखावन पाँडे
- अब मैं नाच्यौ बहुत गुपाल
- खेलत मैं को काको गुसैयाँ
- उर में माखन-चोर गड़े
- हरि हौं सब पतितनि को नायक
- मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी
- चरन-कमल बंदौं हरि−राइ
- हमारे निर्धन के धन राम