परिचय
रसखान (सैयद इब्राहिम) भक्तिकाल की सगुण कृष्ण-भक्ति धारा के अप्रतिम मुस्लिम संत-कवि थे, जो गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के कृपापात्र शिष्य बने। उन्होंने अपनी अलौकिक निष्ठा और अनन्य प्रेम से भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, रूप-सौंदर्य और ब्रजभूमि के कण-कण का अत्यंत सजीव एवं मनोहारी चित्रण किया। 'सुजान रसखान' और 'प्रेमवाटिका' उनकी कालजयी काव्य कृतियाँ हैं, जिनमें सवैया और कवित्त छंद का अद्वितीय माधुर्य देखने को मिलता है। रस, भक्ति और ब्रजभाषा के सहज प्रवाह के कारण उन्हें "रस की खान" अर्थात् रसखान कहा गया।
सुजान रसखान : पद, सवैये एवं प्रमुख रचनाएँ
- भक्ति-भावना / सुजान रसखान
- कृष्ण का अलौकिकत्व / सुजान रसखान
- अनन्य भाव / सुजान रसखान
- मिलन / सुजान रसखान
- बाल-लीला / सुजान रसखान
- रूप-माधुरी / सुजान रसखान
- प्रेम लीला / सुजान रसखान
- बंक बिलोचन / सुजान रसखान
- मुस्कान माधुरी / सुजान रसखान
- कृष्ण सौंदर्य / सुजान रसखान
- रूप प्रभाव / सुजान रसखान
- कुंज लीला / सुजान रसखान
- नटखट कृष्ण / सुजान रसखान
- मुरली प्रभाव / सुजान रसखान
- कालिय दमन / सुजान रसखान
- प्रेमासक्ति / सुजान रसखान
- प्रेम बंधन / सुजान रसखान
- नेत्रोपालंभ / सुजान रसखान
- प्रेम-वेदन / सुजान रसखान
- रास लीला / सुजान रसखान
- फाग-लीला / सुजान रसखान
- राधा का सौंदर्य / सुजान रसखान
- मानवती राधा / सुजान रसखान
- सखी शिक्षा / सुजान रसखान
- संयोग-वर्णन / सुजान रसखान
- वियोग-वर्णन / सुजान रसखान
- कुबलियापीड़-वध / सुजान रसखान
- उद्धव-उपदेश / सुजान रसखान
- ब्रज-प्रेम / सुजान रसखान
- गंगा महिमा / सुजान रसखान
- शिव-महिमा / सुजान रसखान
- जीवन परिचय / रसखान