परिचय
रीतिकाल के मूर्धन्य कवि सेनापति (Senapati) हिंदी साहित्य में अपने अद्वितीय ऋतु-वर्णन और प्रकृति-चित्रण के लिए अप्रतिम माने जाते हैं। उनकी प्रसिद्ध कृति 'कवित्त-रत्नाकर' में श्लेष और अनुप्रास अलंकार का ऐसा विलक्षण प्रयोग मिलता है कि एक ही छंद से ग्रीष्म और वर्षा दोनों का एक साथ चमत्कारिक बोध होता है। ब्रजभाषा के ओजस्वी प्रवाह और बिंब-योजना के कारण सेनापति का ऋतु-वर्णन रीतिकाल की सीमाओं को लांघकर प्रकृति की सजीव अनुभूति कराता है। अपनी पसंद का कवित्त पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें:
सेनापति के प्रमुख कवित्त (Hindi List)
- सारंग धुनि सुनावै घन रस बरसावै / सेनापति
- राखति न दोषै पोषै पिंगल के लच्छन कौं / सेनापति
- गंगा तीरथ के तीर, थके से रहौ जू गिरी / सेनापति
- केतकि, असोक, नव चंपक, बकुल कुल / सेनापति
- दामिनी दमक, सुरचाप की चमक, स्याम / सेनापति
- सोहति उतङ्ग, ससि सङ्ग गङ्ग / सेनापति
- हिम के समीर, तेई बरसैं बिषम तीर / सेनापति
- बरन बरन तरु फूले उपबन बन / सेनापति
Senapati ke Kavitt in Roman Hindi (Hinglish)
- Saarang dhuni sunaavai ghan ras barsaavai / Senapati
- Ganga teerath ke teer, thake se rahau joo giri / Senapati
- Ketak, Ashok, Nav Champak, Bakul kul / Senapati
- Damini damak, surchaap ki chamak, syaam / Senapati
- Barn barn taru phule upban ban / Senapati