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संत पीपाजी के पद : Sant Pipaji Ke Pad

2026-09-07 · Savaiyye-kavitt-pad

परिचय

संत पीपाजी (जन्म नाम प्रताप सिंह) राजस्थान के मध्यकालीन संत और भक्त कवि थे। वे हाड़ौती क्षेत्र से संबंधित माने जाते हैं और भक्ति आंदोलन की संत परंपरा में उनका महत्वपूर्ण स्थान है। पीपाजी ने बाहरी आडंबरों के बजाय ईश्वर-भक्ति, सदाचार और आत्मज्ञान पर बल दिया। उनकी वाणी में सहज भक्ति, वैराग्य और मानवीय समानता के भाव प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। उनके कुछ लोकप्रिय पद निम्नलिखित हैं:

देव भ्रमतौ भ्रमतौ तेरै सरनै आयौ

देव भ्रमतौ भ्रमतौ तेरै सरनै आयौ।
सरणाई बिजै पंजर, सखि रामइया वाई॥टेक॥
लोह कौ साँकल कैसे तूटै हो घण दै धाइ।
मोहकौ साँकल कैसे तूटै हो रामइया राई।
देखी विद्या देख्यौ दान, देखी काया कृतम तंन।
साधु संगति बिन मेरौ कहीं न मानै मंन।
देख्यौ पुंनर देख्यौ पाप, संकल जग देख्या संताप।
प्रणवत पीपौ नरहरि, उद्यमी लै आयै आप॥

संत पीपाजी के अन्य प्रमुख पद

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