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संत चरणदास जी रा पद : Sant Charandas Ke Pad

2026-09-07 · Savaiyye-kavitt-pad

परिचय

संत चरणदास (1703–1781) राजस्थान और उत्तर भारत के अत्यंत प्रतिष्ठित संत, दार्शनिक एवं भक्त कवि थे। उनका जन्म मेवात क्षेत्र के डेहरा (अलवर) में हुआ था और उन्होंने 'चरणदासी संप्रदाय' की स्थापना की। उन्होंने सगुण और निर्गुण भक्ति समन्वय के साथ योग, सदाचार, गुरु-भक्ति तथा आत्मज्ञान को अपनी साधना का मूल आधार बनाया। सरल लोकभाषा (ब्रज और मेवाती मिश्रित हिंदी) में रचित उनकी वाणी आध्यात्मिक चेतना और आंतरिक शुद्धि का गहरा संदेश देती है।

निराकार नहिं ना आकार

निराकार नहिं ना आकार, नहिं अडोल नहिं डोलन हारा।
पांच तत्व तिरगुण ते आगै, अद्भुत अचरज ध्यान न लागै।
नहिं परगट नहिं गूपून ठाऊं, समझ सकौ नहिं थकि थकि जाऊं।
जो कुछ कहिया नाहीं नाहीं, सो सब देखा बांके मांही॥

संत चरणदास के प्रमुख पद

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