परिचय
रसखान (सैयद इब्राहिम) भक्तिकाल की कृष्ण-काव्य धारा के अनन्य और रससिद्ध भक्त-कवि थे। गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के शिष्य बनकर उन्होंने ब्रजभूमि को ही अपना संपूर्ण जीवन और साधना समर्पित कर दिया। इनकी रचनाओं में सवैया छंद का जैसा सहज, कर्णप्रिय और भावपूर्ण प्रयोग मिलता है, वह हिंदी साहित्य में अद्वितीय है। भगवान श्रीकृष्ण के बाल-रूप, रूप-माधुरी, मुरली-वादन और ब्रज-प्रेम पर आधारित इनकी रचनाएँ 'सुजान रसखान' और 'प्रेमवाटिका' में अमर हैं।
रसखान के प्रसिद्ध सवैये एवं दोहे (अर्थ सहित)
- सेस गनेस महेस दिनेस / रसखान के सवैया
- अली पगे रँगे जे रँग सावरे / रसखान के सवैया
- काह कहूँ सजनी सँग की / रसखान के सवैया
- मानुष हौं तो वही रसखानि / रसखान के सवैया
- अंगनि अंग मिलाय दोऊ / रसखान के सवैया
- एक समै मुरली धुनि / रसखान के सवैया
- कौन ठगौरी भरी हरि आजु / रसखान के सवैया
- कल काननि कुंडल मोरपखा / रसखान के सवैया
- ब्रह्मा मैं ढूँढ्यो पुरानन गानन / रसखान के सवैया
- धूरि भरे अति सोभित श्यामजू / रसखान के सवैया
- बंसी बजावत आनि कढ़ो / रसखान के सवैया
- या लकुटी अरु कामरिया पर / रसखान के सवैया
- मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं / रसखान के सवैया
- कान्ह भए बस बाँसुरी के / रसखान के सवैया
- बागन काहे को जाओ पिया / रसखान के सवैया
- प्रान वही जु रहै रिझि वा पर / रसखान के सवैया
- मेरो सुभाव चितैवे को माइ री / रसखान के सवैया
- काननि दै अँगुरी रहिवो / रसखान के सवैया
- शंकर से सुर जाहि भजैं / रसखान के सवैया
- प्रेम मरोरि उठै तब ही / रसखान के सवैया
- फागुन लाग्यौ जब ते तब ते / रसखान के सवैया
- यह देखि धतूरे के पात चवात / रसखान के सवैया
- खेलतु फाग लख्यी पिय प्यारी / रसखान के सवैया
- अँखियाँ अँखियाँ सों सकाय / रसखान के सवैया
- बाँकी बिलोकनि रंग भरी / रसखान के सवैया
- श्री सुख यौ न बखान सकै / रसखान के सवैया
- आयो हुतो नियरें रसखानि / रसखान के सवैया
- मोहन के मन भाइ गयौ / रसखान के सवैया
- गावैं गुनी गनिका गंधर्ब / रसखान के सवैया
- सोहत हैं चँदवा सिर मौर / रसखान के सवैया
- सुन री पिय मोहन की बतियाँ / रसखान के सवैया
- भौंह भरी बरुनी सुथरी अतिसै / रसखान के सवैया
- नैननि बंकनि साल के बाननि / रसखान के सवैया
- जा दिन तें निरख्यो नंदनंदन / रसखान के सवैया
- मैन मनोहर मूरि लखै / रसखान के सवैया
- लोक की लाज तजी तबहीं / रसखान के सवैया
- बंक बिलोकनि है दुखमोचन / रसखान के सवैया
- अति लोक की लाज समूह / रसखान के सवैया
- खंजन नैन फँसे पिंजरा / रसखान के सवैया
- आजु गई हुती भोरही हौं / रसखान के सवैया
- खेलत फाग सुहाग भरी / रसखान के सवैया
- उनहीं के सनेहन सानी रहैं / रसखान के सवैया
- मैन मनोहर बैन बजै सु / रसखान के सवैया
- जा दिन तें मुसिकानि चुभी उर / रसखान के सवैया
- आजु सखी नँदनंदन रो तकि / रसखान के सवैया
- बारहीं गोरस बेंचि री आजु / रसखान के सवैया
- देखन कों सखी नैन भए न / रसखान के सवैया
- कौन को लाल सलोनो सखी / रसखान के सवैया
- सुंदर स्याम सिरोमनि मोहन / रसखान के सवैया
- रसखान जीवन परिचय
- प्रेमवाटिका / रसखान के दोहे