परिचय
नंददास जी भक्तिकाल की पुष्टिमार्गीय शाखा और अष्टछाप के प्रमुख कवियों में सूरदास जी के बाद सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वे गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के शिष्य थे और अपनी अद्भुत काव्य-कला व शब्द-चयन के लिए साहित्य जगत में 'और कवि गढ़िया, नंददास जड़िया' के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनकी कृतियों में 'रासपंचाध्यायी', 'भंवरगीत' और भक्ति पद प्रमुख हैं, जिनमें ब्रजभाषा का अत्यंत परिष्कृत, संगीतमय और कोमलकांत रूप देखने को मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं युगल लीलाओं के सजीव चित्रण में नंददास जी का योगदान अद्वितीय है।
नंददास के पद एवं प्रमुख रचनाएँ
- छोटो सो कन्हैया एक मुरली मधुर छोटी / नंददास
- आज वृंदाविपिन कुंज अद्भुत नई / नंददास
- तपन लाग्यौ घाम, परत अति धूप भैया / नंददास
- रुचिर चित्रसारी सघन कुंज में मध्य कुसुम-रावटी राजै / नंददास
- ऊधव के उपदेश सुनो ब्रज नागरी / नंददास
- सूर आयौ माथे पर, छाया आई पाँइन तर / नंददास
- जुरि चली हें बधावन नंद महर घर / नंददास
- झूलत राधामोहन / नंददास
- माई फूल को हिंडोरो बन्यो, फूल रही यमुना / नंददास
- श्री लक्ष्मण घर बाजत आज बधाई / नंददास
- फल फलित होय फलरूप जाने / नंददास
- भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई / नंददास
- ताते श्री यमुने यमुने जु गावो / नंददास
- नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई / नंददास
- भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी / नंददास
- अरी चल दूल्हे देखन जाय / नंददास
- माई आज तो गोकुल ग्राम / नंददास
- प्रात समय श्री वल्ल्लभ सुत को / नंददास
- नंद भवन को भूषण माई / नंददास
- जीवन परिचय / नंददास