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हित हरिवंश के पद | Shri Hit Harivansh Ji Ke Pad

2024-12-02 · Savaiyye-kavitt-pad

परिचय

गोस्वामी हितहरिवंश महाप्रभु (1502–1552) ब्रज के राधावल्लभ संप्रदाय के प्रवर्तक, महान संत और भक्तिकाल की रसोपासना धारा के मूर्धन्य कवि थे। उनका जन्म मथुरा के निकट बाद ग्राम में हुआ था और उन्होंने वृंदावन को अपनी साधना व निकुंज उपासना का केंद्र बनाया। उन्होंने श्री राधा को ही आराध्य और प्रेम की पराकाष्ठा मानकर अनन्य भाव से 'हित चौरासी' और 'स्फुट वाणी' जैसे अमर पदों की रचना ब्रजभाषा में की। उनके रचे पद, दोहे और छप्पय प्रेम-रस, माधुर्य भक्ति और आत्म-निवेदन के अप्रतिम उदाहरण हैं, जो सदियों से रसिक जनों के कंठहार बने हुए हैं।

हितहरिवंश जी के पद, दोहे व रचनाएँ | Hit Harivansh Rachna Sangrah

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