परिचय
स्वामी हरिदास जी (1478–1573) भक्तिकाल के प्रख्यात संत, संगीत-शिरोमणि और सखी संप्रदाय (हरिदासी संप्रदाय) के प्रवर्तक थे। वे वृन्दावन के निधिवन में श्री बांकेबिहारी जी के अनन्य उपासक और संगीत सम्राट तानसेन के परम गुरु माने जाते हैं। इनकी साधना में राधा-कृष्ण के नित्य-विहार और केली-लीला की मधुर उपासना सर्वोपरि है। स्वामी जी के शास्त्रीय राग-रागिनियों में आबद्ध ध्रुपद पद भारतीय संगीत और ब्रजभाषा साहित्य की अनमोल धरोहर हैं।
स्वामी हरिदास के पद एवं प्रमुख रचनाएँ
- तिनका बयारि के बस / स्वामी हरिदास
- जौं लौं जीवै तौं लौं हरि भजु / स्वामी हरिदास
- गहौ मन सब रस को रस सार / स्वामी हरिदास
- ज्यौंहिं ज्यौंहिं तुम रखत हौं / स्वामी हरिदास
- श्री वल्लभ कृपा निधान अति उदार करुनामय / स्वामी हरिदास
- श्री वल्लभ मधुराकृति मेरे / स्वामी हरिदास
- प्रगट व्है मारग रीत बताई / स्वामी हरिदास
- डोल झूले श्याम श्याम सहेली / स्वामी हरिदास
- गहौ मन सब रसको रस सार (भाव 2) / स्वामी हरिदास
- प्रेम समुद्र रुप रस गहिरे / स्वामी हरिदास
- हरि को ऐसोइ सब खेल / स्वामी हरिदास
- हरि के नाम को आलस क्यों करत है रे / स्वामी हरिदास
- काहू को बस नाहिं तुम्हारी कृपा तें / स्वामी हरिदास
- हित तौ कीजै कमलनैन सों / स्वामी हरिदास
- स्वामी हरिदास परिचय / Swami Haridas Parichay