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गदाधर भट्ट के पद | Gadadhar Bhatt Ji Ke Pad

2024-12-02 · Savaiyye-kavitt-pad

परिचय

गदाधर भट्ट (16वीं शताब्दी) भक्तिकाल की गौड़ीय वैष्णव शाखा के अत्यंत आदरणीय और प्रमुख भक्त-कवि थे, जिनका जन्म दक्षिण भारत में हुआ था लेकिन उन्होंने वृंदावन को अपनी साधना-स्थली बनाया। वे श्री चैतन्य महाप्रभु के अनन्य अनुयायी थे और वृंदावन के प्रसिद्ध मदनमोहन जी मंदिर से उनका गहरा संबंध रहा। ब्रजभाषा और संस्कृत पर उनका असाधारण अधिकार था; उनके पदों में राधा-कृष्ण के युगल रूप, निकुंज-लीला और अनन्य शरणागति का अनुपम माधुर्य झलकता है। ‘सखी, हौं स्याम रंग रँगी’ जैसे उनके अमर पद आज भी वैष्णव संतों और ब्रज रसियाओं के कंठहार हैं।

गदाधर भट्ट के प्रमुख पद व रचनाएँ

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